Navjot Singh Sidhu : ठोको ताली ...क्योंकि नवजोत सिंह सिद्धू की हो सकती है जल्दी रिहाई, जानिए क्यों हुई थी जेल..
<p><em>सज़ा मिलने के बाद पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू लगातार जेल में ही रहे और एक भी छुट्टी नहीं ली। इसी का फायदा उन्हें मिलेगा और अब उनके जेल से बाहर आने की कयास लगायी जा रही है। आगामी एक अप्रैल को सिद्धू जेल से बाहर आ सकते हैं।</em></p>
इस कारण से मिलेगी जल्दी रिहाई
नवजोत सिंह सिद्धू 20 मई 2022 को जेल गए थे लेकिन उन्हें रिहाई के लिए 19 मई 2023 तक इंतजार नहीं करना होगा। जेल नियमों के अनुसार कैदियों को हर महीने 4 दिन की छुट्टी दी जाती है लेकिन सिद्धू ने इस दौरान एक दिन भी छुट्टी नहीं ली। इस लिहाज से उनकी सज़ा 48 दिन पहले मार्च के आखिर तक पूरी हो जाएगी और वे 1 अप्रैल को बाहर आ सकते हैं।
पहले भी उम्मीदें थी जल्दी बाहर आने की
हालांकि इससे पहले उनकी 26 जनवरी को ही रिहाई की उम्मीद जताई जा रही थी। इसके पीछे उनके अच्छे बर्ताव को वजह माना जा रहा था। जेल प्रशासन ने 56 लोगों की फाइल बनाई गई थी, जिन्हें अच्छे आचरण के चलते गणतंत्र दिवस के दिन जेल से रिहा होना था लेकिन राज्य सरकार की तरफ से दी गई कैदियों की सजामाफी लिस्ट में उनका नाम शामिल नहीं था। इसके साथ ही कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को रखा नहीं गया। न यह प्रस्ताव कैबिनेट में पास हुआ और न ही यह पंजाब राज्यपाल के पास हस्ताक्षर होने के लिए गया। पंजाब कांग्रेस का एक गुट सिद्धू के स्वागत की तैयारियों में भी जुट गया था लेकिन उनकी सारी तैयारियां धरी रह गई थी।
इस संगीन जुर्म में मिली थी सिद्धू को जेल की सजा
नवजोत सिंह सिद्धू को पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने साल 1988 के रोडरेज केस में एक साल की सजा सुनाई थी। दरअसल 27 दिसंबर, 1988 को वे अपने एक दोस्त रुपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरावाले मार्केट में पार्किंग को लेकर 65 साल के गुरनाम सिंह से बहस हो गई. यह बहस मारपीट में बदल गई और सिद्धू ने गुरनाम को घुटना मारकर गिरा दिया. इससे गुरनाम सिंह जख्मी हो गए और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई. उस समय सिद्धू भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेल रहे थे और इस कारण बेहद चर्चित थे। मामले में सिद्धू के खिलाफ हत्या का मुकदमा चला और 2007 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया।
अरुण जेटली ने लड़ा था केस
दिवंगत केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने सिद्धू की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में यह केस लड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को बरी घोषित करते हुए सिद्धू पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया था। इस दौरान सिद्धू अमृतसर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर सांसद बन गए थे। सितंबर, 2018 में गुरनाम के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की, जिस पर 19 मई, 2022 को सिद्धू को 1 साल की सजा सुनाई गई थी।
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