जनसंख्या पर जुबानी जंग: ओवैसी बोले, कंडोम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल मुसलमान कर रहे
<p><strong><em>ओवैसी का ये बयान संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान का जवाब था, जिसमें भागवत ने कहा था कि जनसंख्या नियंत्रण और धर्म आधारित जनसंख्या असंतुलन ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें लंबे समय तक नजरंदाज नहीं किया जा सकता। </em></strong></p>
पॉपुलेशन कंट्रोल का मुद्दा फिर गर्मा गया है। ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलिमीन अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को बयान देकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को कहा कि कंडोम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल मुसलमान कर रहे हैं, लेकिन आरएसएस चीफ इस पर कुछ नहीं बोलते। वे डेटा रखकर बात ही नहीं करते।
ओवैसी का ये बयान संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान का जवाब था, जिसमें भागवत ने कहा था कि जनसंख्या नियंत्रण और धर्म आधारित जनसंख्या असंतुलन ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें लंबे समय तक नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
जनसंख्या पर ओवैसी का पूरा बयान क्या है?
ओवैसी ने एक सभा में कहा, कहते हैं कि पॉपुलेशन कंट्रोल करना है। मुसलमानों की आबादी नहीं बढ़ रही। आबादी गिर रही है हमारी। हर टीवी पर बैठकर बोलते हैं। एक बच्चे के बाद दूसरे बच्चे पैदा करने के बीच का जो वक्त होता है उसे स्पेसिंग बोलते हैं। सबसे ज्यादा स्पेसिंग मुसलमान कर रहे हैं। सबसे ज्यादा कंडोम का इस्तेमाल मुसलमान कर रहे हैं। मोहन भागवत इस पर नहीं
केन्द्र सरकार के हलफनामे का जिक्र
ओवैसी ने केंद्र सरकार के ही एक हलफनामे का जिक्र किया, जो 2020 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया था। ओवैसी ने कहा कि मोदी सरकार ने खुद अदालत से कहा था कि जनसंख्या नियंत्रण मजबूरी नहीं हो सकती है और न ही सरकार ऐसा चाहती है। ओवैसी ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे का भी जिक्र किया।
भागवत ने क्या कहा था
नागपुर में संघ के विजयादशमी समारोह में आरएसएस चीफ भागवत ने जनसंख्या पर पॉलिसी बनाने की बात कही थी। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और महिला सशक्तिकरण जैसे कई मुद्दों पर बयान दिया। उन्होंने कहा था- जनसंख्या नियंत्रण और धर्म आधारित जनसंख्या संतुलन ऐसे अहम मुद्दे हैं, जिन्हें लंबे समय तक नजंरदाज नहीं किया जा सकता है। एक संपूर्ण जनसंख्या पॉलिसी लाई जानी चाहिए और ये सभी पर बराबरी से लागू हो। धर्म आधारित असंतुलन और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन देश को तोड़ देते हैं। ईस्ट टिमोर, कोसोवो और साउथ सूडान जैसे नए देश धार्मिक आधार पर हुए असंतुलन का उदाहरण हैं।
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