इस तरह करें अपने पितरों का श्राद्ध..जानिए क्या और कैसे करना चाहिए तर्पण हिंदी में..!
<p><em>पूर्वजों को श्रद्धा के साथ याद करना और उनके निमित्त भोजन करने के लिए उचित व योग्य ब्राह्मण को बुलाकर भोजन कराना और फिर उन्हें सम्मान से विदा करना ही सच्चा श्राद्ध (<strong>Shradh)</strong> कहलाता है। यदि <strong>श्राद्ध</strong> पक्ष में हम हमारे पितरों का श्राद्ध कर रहे हैं तो सर्वप्रथम हमें <strong>श्राद्ध </strong>से पूर्व किसी योग्य कर्मकांडी ब्राह्मण को भोजन के लिए आमंत्रित करना चाहिए। भोजन करवाने से पूर्व अपने घर में गंगाजल का छिड़काव कर लेना चाहिए।</em></p>
भोजन में तोरई की सब्जी, मूली, दही बड़े (उड़द की दाल के ) तथा मिठाई में इमरती तथा खीर जरूर बनाएं।
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अव्वल तो ब्राह्मण को भोजन से 15-20 मिनट पूर्व का ही समय दें, उन्हें भोजन समय से बहुत पहले का न्यौता ना दें। यदि किसी कारणवश वे समय से कुछ ज्यादा ही पहले आ जाएं तो उन्हें अपने निजी कार्य में उलझाएं नहीं। ब्राह्मण जहां बैठेंगे उस स्थान को स्वच्छ और शुद्ध कर लेना चाहिए। इसके लिए गंगाजल का छिड़काव कर देना चाहिए। ब्राह्मण के बैठने के लिए जमीन पर आसन लगाएं।
भोजन के लिए दो थाली भोजन निकालें। एक थाली में चार जगह दो-दो पूरी के ऊपर सभी बनाई गई भोजन की सामग्री को थोड़ा-थोड़ा रखें। दूसरी थाली में सभी भोजन सामग्री रखें। एक कंडे को अग्नि में जला लेना (राख नहीं करना है)। जिस स्थान पर जला हुआ कंडा रखना है, वहां पहले थोड़ा सा गंगाजल छिड़कें और फिर जले हुए कंडे पर दूसरी थाली में से थोड़ी-थोड़ी भोजन सामग्री रख दें तथा अपने पितरों का आह्वान करें कि वे आकर भोजन स्वीकार करें। प्रथम थाली में से एक हिस्सा गाय को, दूसरा कुत्ते को, तीसरा कौवे को तथा चौथा हिस्सा किसी साधु को देना चाहिए।
दूसरी थाली ब्राह्मण को भोग के लिए प्रस्तुत करे। जब ब्राह्मण भोजन कर रहे हों उस समय आप भी जमीन पर ही बैठें तथा भोजन के लिए मनुहार करें। भोजन करते समय ब्राह्मण से ना तो अनावश्यक बात नहीं करें। ब्राह्मण को भोजन के पश्चात पाँच वस्त्र तथा दक्षिणा जरूर देवे। फिर सम्मान पूर्वक विदा करें।
श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण को भोजन कराने से पूर्व स्नान कर श्राद्ध वाले दिन तर्पण भी किए जाने का प्रावधान है।
तर्पण विधि
एक चौड़े मुंह के बर्तन में एक लोटा जल ले लें। अब उस बर्तन में गंगाजल, कच्चा दूध, जौ,काले तिल तथा एक पताशा मिला लें।
संस्कृत की बजाय हिंदी में ही संकल्प लें
मैं----पिता का नाम----- दादाजी का नाम----- गोत्र---- निवासी----- आज दिनांक---अश्विन माह की कृष्ण पक्ष---- तिथि को श्राद्ध पक्ष में अपने पितृ देवता आदरणीय (नाम व संबंध).... को नमस्कार करता हूं। आप पधारें तथा अन्न-जल ग्रहण करें। हमारे सभी मनोरथ पूरा करें। हमें सब शुभ आशीर्वाद प्रदान करें। घर में धन बढ़े, धान्य भरे तथा आप का कुल बढ़े।
जल में से 9 बार सूर्य की तरफ मुख करके जलांजलि देते हुए इस मंत्र को बोलें
ॐ पितृदेवताभ्यो नमः
तर्पण करने के बाद ब्राह्मण देवता को भोजन कराएं।
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