जब ब्रह्रा, विष्णु, महेश, देवी सरस्वती, पार्वती और महालक्ष्मी जैसी देवियां हैं तो क्यों पूजें अपने कुल देवियों और कुल देवताओं को..?

<p><strong><strong><em>कई बार यह प्रश्न उठता है कि जब ब्रह्रा, विष्णु, महेश, देवी सरस्वती, पार्वती और महालक्ष्मी जैसी देवियां हैं तो और परम शक्ति के तौर पर उन्हें पूजा जाता है तो फिर कुल देवियों और कुल देवताओं का जीवन में क्या महत्व है..</em></strong><strong><em>? क्यों उन्हें नियमित तौर पर शीश नवाना चाहिए..?</em></strong></strong></p>

जब ब्रह्रा, विष्णु, महेश, देवी सरस्वती, पार्वती और महालक्ष्मी जैसी देवियां हैं तो क्यों पूजें अपने कुल देवियों और कुल देवताओं को..?
28-09-2023 - 11:40 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

आपने अक्सर सुना होगा कि अपने रीति-रिवाजों में विश्वास रखने वाले लोग परिवार में नये प्राणी के जन्म लेने पर अक्सर कुल देवता या कुल देवियों के स्थान पर जाकर शीश नवाते हैं। हमें नियमित तौर पर अपने कुल देवता या कुल देवियों को पूजना ही चाहिए। विशेष प्रयोजनों पर तो उन्हें बिल्कुल ही भूलना नहीं चाहिए।

इसी संदर्भ में एक आख्यान आता है कि रामायण काल में लक्ष्मण और मेघनाथ का युद्ध चल रहा था, जब मेघनाथ की सारी माया विफल हो गई तब उसने शक्ति बाण का प्रयोग किया जिससे लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए। फिर, हनुमान जी संजीवनी बूटी वाला पहाड़ ही उठाकर ले आए और संजीवटी बूटी खिलाकर लक्ष्मण जी की मूर्छा दूर की गई। लक्ष्मण जी इसके बाद पुनः युद्ध के तैयार होने लगे। यह सब जानकर मेघनाथ अपनी कुलदेवी निकुम्बला माता के मंदिर में यज्ञ करने चल दिया, यज्ञ सफल होने पर मेघनाथ को ब्रम्हशिर महाअस्त्र तथा एक ऐसा रथ मिलता जिसपर सवार होने पर उसे कोई भी पराजित नहीं कर पाता ।

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यह बात मेघवान के चाचा यानी विभीषण को पता चली तो उन्होने यह रहस्य भगवान राम को बताया, भगवान राम जी ने लक्ष्मण जी को हनुमान जी के साथ  मेघनाथ से युद्ध करने के लिए भेजा, हनुमान जी ने मेघनाथ का यज्ञ भंग कर दिया और मेघनाथ का वध लक्ष्मण जी द्वारा संभव हो सका। अब प्रश्न यह हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अलावा सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती जी को अंतिम और परम शक्ति माना गया है। ऐसे में आखिर क्या कारण रहा कि इनके रहते हुए मेघनाथ इनकी शरण की बजाय अपनी कुलदेवी की शरण में गया..? वो भी अपनी उन कुलदेवी माता निकुंबला की शरण में  जिनका शायद ही किसी ने नाम सुना है ?

कुलदेवी या कुलदेवता का स्थान सबसे पहले आता और सबसे बड़ा है, अगर वे प्रसन्न और सक्रिय हैं तो कोई भी नकारात्मक शक्ति ना ही घर में प्रवेश कर सकती है और न ना ही बाहर क्षति पहुंचा सकती हैं। वे अपने कुल की रक्षा करने के लिए बाध्य होते हैं। अन्य देवी-देवता तो छल कर सकते हैं लेकिन कुलदेवी या कुलदेवता नहीं । कुलदेवी या कुलदेवता प्रसन्न हों तो काल भी समय से पूर्व कुछ नहीं कर सकता है।

लेखकः- अज्ञात

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