रतन टाटा का भरोसेमंद इंटर्न... आज है दिग्गज सीईओ, 100 करोड़ है सालाना सैलरी
<p><em>एन. चंद्रशेखरन आज जिन कंपनी की कमान संभालते हैं, कभी उसी कंपनी में इंटर्नशिप करते थे। टाटा-साइरस मिस्त्री विवाद के बाद उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था। चंद्रशेखरन का वेतन साल 2019 में 65 करोड़ रुपये सालाना था। एन चंद्रशेखरन 128 अरब डॉलर वाली टाटा कंपनी को बीते सात सालों से संभाल रहे हैं।</em></p>
देश की दिग्गज और विश्वसनीय कंपनी टाटा की कमान एन. चंद्रशेखरन संभाल रहे हैं। एन. चंद्रशेखरन कंपनी के साथ-साथ रतन टाटा के भी बेहद करीब हैं। आज चंद्रशेखरन आज जिस कंपनी की कमान संभालते हैं, कभी उसी कंपनी में इंटर्नशिप करते थे। हालांकि यह बात ज्यादातर लोगों को पता नहीं है। रतन टाटा उन पर भरोसा करते हैं। एन. चंद्रशेखरन 128 अरब डॉलर वाली टाटा कंपनी को बीते सात सालों से संभाल रहे हैं। टाटा-साइरस मिस्त्री विवाद के बाद उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था। चंद्रशेखरन की पत्नी का नाम ललिता है और उनका बेटा है, जिसका नाम प्रणव चंद्रशेखरन है। एन. चंद्रशेखरन ने साल 2020 में 98 करोड़ रुपये में मुंबई की पेड्डर रोड पर डुप्लेक्स फ्लैट खरीदा था।
100 करोड़ से ज्यादा सैलरी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंद्रशेखरन का वेतन साल 2019 में 65 करोड़ रुपये सालाना था। साल 2021-22 में इसे बढ़ाकर 109 करोड़ रुपये कर दिया गया था। वह भारत में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले बिजनेस एक्जीक्यूटिव बने थे। चंद्रशेखरन की अगुआई में 2022 में टाटा ग्रुप का मुनाफा 64267 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। जबकि 2017 में जब उन्होंने कार्यभार संभाला था तब मुनाफा 36728 करोड़ रुपये था। चंद्रशेखरन के कार्यकाल के 5 साल में टाटा ग्रुप का राजस्व 6.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9.44 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस फ्लैट का रेंट ही 20 लाख रुपये महीना है।
कभी नहीं तोड़ते रूटीन
एन. चंद्रशेखरन का जन्म 1963 में तमिलनाडु के बेहद साधारण किसान परिवार में हुआ, उनका बचपन अभावों में बीता। लेकिन उन्होंने मेहनत में कोई कमी नहीं की। एन. चंद्रशेखरन फिटनेस के मामले भी आगे रहते हैं। चंद्रशेखरन कभी भी अपने रुटीन को नहीं तोड़ते हैं। ऑफिस के काम में चाहे कितनी भी देर क्यों न हो जाए वो रोज सुबह 4 बजे उठकर दौड़ते हैं। वो एक मैराथन रनर हैं। मैराथन और हाफ मैराथन में हिस्सा लेने के लिए वो दुनियाभर में घूम चुके हैं।
सबसे यंग सीईओ
चंद्रशेखरन पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1987 में एक इंटर्न के तौर पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ जुड़े थे। अगले 2 दशक से उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ीं। साल 2007 में उन्हें टीसीएस के बोर्ड में शामिल किया गया और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बना दिया गया। इसके बाद साल 2009 में वह 46 साल की उम्र में टीसीएस के सीईओ बन गए। वह टाटा समूह में सीईओ बनने वाले सबसे युवा लोगों में से एक थे।
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