हल्द्वानी की गफूर बस्ती अतिक्रमण हटाने के लिए बुल्डोजर चलाने पर सर्वोच्च न्यायालय की रोक..!
<p><em>उत्तराखण्ड के हल्द्वानी जिले में रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर बसी गफूर बस्ती (Gafoor Basti) पर अतिक्रमण हटाने को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय ने फिलहाल रोक लगा दी है। इस रोक के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने उत्‍तराखंड सरकार और रेलवे को भी नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी को होगी।</em></p>
सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान अपने पक्ष में फैसला हो, इसके लिए गफूर बस्ती में दुआएं की जा रही थीं और ऐसा लगता है कि दुआ के लिए उठे इन हाथों को फिलहाल सुन लिया है। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि गफूर बस्ती में अतिक्रमण हटाने से करीब 50 हजार परिवार प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिसर एक्ट के तहत यह कार्रवाई मान्य नहीं है। दूसरी ओर, उत्तराखंड सरकार का कहना है कि गफूर बस्ती रेलवे की जमीन पर बसी है। यहां रहने वाले लोगों ने रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण किया है।
सात दिन के भीतर कैसे अतिक्रमण हटाने को कह सकते हैं: जस्टिस कौल
सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने कहा कि इस मामले को मानवीय नजरिए से देखना चाहिए। हम सात दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश कैसे दे सकते हैं। लोगों के घरों को ध्वस्त करने से पहले पुनर्वास का काम कराया जाना चाहिए। कुछ लोगों के पास 1947 के समय के जमीन पट्टे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि गफूर बस्ती की कितनी जमीन राज्य सरकार की है और कितनी रेलवे की?
उत्तराखण्ड उच्च न्य़ायालय ने दिया था आदेश
उल्लेखनीय है कि बीते 27 दिसंबर को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी के वनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिये थे। हाईकोर्ट ने एक हफ्ते के भीतर अतिक्रमण हटाने को कहा था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद से ही गफूर बस्ती में रहने वाले लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनका परिवार यहां परदादा और दादा के जमाने से रहता आया है। उत्तराखंड सरकार पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था करे, उसके बाद ही बस्ती को खाली कराए। हाईकोर्ट ने गफूर बस्ती के लोगों से अपने लाइसेंसी हथियार भी जमा कराने का आदेश दिया था।
What's Your Reaction?