‘अमीरों’ की मनमानी..! अरब देशों ने काल्पनिक मंदी के डर से घटाया तेल उत्पादन, भारत पर भी असर
<p><em><strong>दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादकों ने अचानक तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा कर दी है। उनके ऐसा करने के बाद कच्चे तेल के दाम बढ रहे हैं।</strong></em></p>
रविवार को सऊदी अरब, इराक और खाड़ी के कई अन्य देशों ने प्रतिदिन तेल उत्पादन को दस लाख बैरल तक कम करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उथल-पुथल है। सोमवार को कारोबार शुरू होने के शुरुआती घंटों में ही ब्रेंट क्रूड तेल के दाम प्रति बैरल 5 डॉलर तक बढ़ गए। यानी करीब 7 फीसदी की वृद्धि के साथ दाम 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए।
विश्लेषक मानते हैं कि तेल के दाम अगर बढ़े तो महंगाई को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। अगर तेल के दामों में तेजी आई तो यातायात सेवाओं के दाम बढ़ सकते हैं।
कौन कितना घटाएगा उत्पादन
सऊदी अरब 5 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती करने जा रहा है। वहीं, इराक 2 लाख 11 हजार बैरल प्रतिदिन की कटौती करेगा। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कुवैत और अल्जीरिया भी उत्पादन कम करने जा रहे हैं। सऊदी अरब ने एक बयान में कहा है कि ये कदम तेल बाजार की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए एहतियातन उठाया जा रहा है। वहीं, कुवैत के तेल मंत्री बदर अल मुल्ला ने भी एक बयान में कहा है कि तेल उत्पादन कम करने का फैसला एहतियातन लिया गया है. रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सेंडर नोवाक ने एक बयान में कहा है कि ‘ओपेक प्लस तेल उत्पादन में कटौती करने के लिए इसलिए तैयार हुआ है क्योंकि बाजार अस्थिर है और वैश्विक बाजार में जरूरत से अधिक तेल उपलब्ध है।’
क्यों कटौती कर रहे हैं अरब देश?
तेल उत्पादन में कटौती का ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अमेरिका का स्ट्रेटेजिक रिजर्व (आपात स्थिति के लिए तेल का भंडार) बेहद कम स्तर पर है। अपने भंडार को भरने के लिए अमेरिका को बड़ी मात्रा में तेल खरीदना पड़ रहा है। अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो अमेरिका को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेंगी।
विष्लेषक कहते हैं, ‘तेल उत्पादक देश ये दिखा रहे हैं कि अब हम अपनी मर्जी से कीमतें निर्धारित करेंगे और उत्पादन तय करेंगे। किसी के दबाव में नहीं आएंगे। पहले सऊदी अरब अमेरिका के प्रभाव में रहता था लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि सऊदी अमेरिका को संकेत दे रहा है कि वो अपने तेल के मामले में अपनी मर्जी का मालिक है।’
भारत पर कितना होगा असर
विश्लेषक कहते हैं, जाहिर है अगर तेल का उत्पादन कम होता है और अगर उससे तेल की कीमत बढ़ती है तो उसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था तेल पर ही आधारित है। भारत के रूस और सऊदी अरब से सामरिक संबंध हैं, ऐसे में अगर तेल के दाम बढ़ेंगे भी तब भी भारत को तेल मिलता रहेगा। भारत यूक्रेन युद्ध से पहले सिर्फ अपना दो प्रतिशत तेल रूस से खरीदता था लेकिन अब भारत 27 फीसदी तेल रूस से खरीद रहा है।
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