आज नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी के स्वरूप, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, भोग,कथा और  मंत्र 

<p>20 अक्टूबर को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के छठें स्वरूप देवी कात्यायनी की पूजा करने का विधान है।&nbsp;कहा जाता है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भी जातक देवी कात्यायनी की पूजा पूरी श्रद्धा से करता है, उसे परम पद की प्राप्ति होती है। यहां जानिए मां कात्यायनी की पूजा विधि, आरती, कथा ,मंत्र और प्रिय भोग के बारे में...&nbsp;</p>

आज नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी के स्वरूप, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, भोग,कथा और  मंत्र 
20-10-2023 - 07:50 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

Shardiya Navratri 2023 6th Day:

षष्ठी तिथि आरम्भ - 20 अक्टूबर 2023 को मध्यरात्रि 12 बजकर 32 मिनट 

षष्ठी तिथि समाप्ति - 20 अक्टूबर, शुक्रवार को रात्रि 11 बजकर 25 मिनट तक

मां कात्यायनी का स्वरूप

मां कात्यायनी का स्वरूप चमकीला और तेजमय है। इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में रहता है। वहीं नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है। मां कात्यायनी के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार धारण करती हैं व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है।

मां कात्यायनी की पूजा विधि

नवरात्रि के छठे दिन इस दिन प्रातः काल में स्नान आदि से निवृत्त होकर मां का गंगाजल से आचमन करें। फिर देवी कात्यायनी का ध्यान करते हुए उनके समक्ष धूप दीप प्रज्ज्वलित करें। रोली से मां का तिलक करें अक्षत अर्पित कर पूजन करें। इस दिन मां कात्यायानी को गुड़हल या लाल रंग का फूल चढ़ाना चाहिए। अंत में मां कात्यायनी की आरती करें और क्षमायाचना करें।

मां कात्यायनी प्रिय भोग

इस दिन मां कात्यायनी को पूजन में शहद का को भोग लगाना चाहिए। इससे मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।

मां कात्यायनी की कथा

पौराणिक कथानुसार, कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन का जन्म हुआ, जिन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली । कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बहुत अधिक बढ़ गया, तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज़ का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को प्रकट किया   । देवी ने महर्षि कात्यायन के घर कात्यायनी के रूप में जन्म लिया और दशमी के दिन महिषासुर का वध किया। 

मां कात्यायनी आराधना मंत्र

1.   या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
      नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

2.   चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|
      कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि||

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।