दिल्ली की अदालत ने IRCTC घोटाले में लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय किए.. अदालत ने कहा, ‘कार्रवाई के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद’
बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक एक महीने पहले, दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ IRCTC घोटाले में भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय कर..
नयी दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक एक महीने पहले, दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ IRCTC घोटाले में भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय कर दिए।
मामले की सुनवाई अब 27 अक्टूबर से 7 नवंबर तक प्रतिदिन चलेगी, जबकि बिहार में दो चरणों में चुनाव 6 और 11 नवंबर को होंगे।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आरजेडी के इस “पहले परिवार” सहित अन्य आरोपियों पर आरोप तय करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए “पर्याप्त सामग्री उपलब्ध” है।
कानूनी कार्रवाई के घेरे में
- राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव: आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय।
- लालू प्रसाद यादव: आपराधिक कदाचार और साजिश के आरोपों में घिरे।
मामले की पृष्ठभूमि
- 7 जुलाई 2017: CBI ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ FIR दर्ज की।
- अप्रैल 2018: CBI ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की।
- 1 मार्च 2025: CBI ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी सहित अन्य के खिलाफ अपनी बहस पूरी की।
- 24 सितंबर 2025: अदालत ने सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया।
- 13 अक्टूबर 2025: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने औपचारिक रूप से आरोप तय किए।
अदालत के अवलोकन
अदालत ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य एक “गहरे षड्यंत्र” की ओर इशारा करते हैं जिसमें टेंडरों में हेरफेर, कीमती भूमि का कम मूल्यांकन, और सार्वजनिक पद का निजी लाभ के लिए दुरुपयोग शामिल है।
न्यायाधीश गोगने ने अपने आदेश में लिखा, “पूरा मामला तथाकथित निजी भागीदारी के नाम पर भाई-भतीजावाद (crony capitalism) का उदाहरण प्रतीत होता है। यह साजिश पूरी तरह छिपी नहीं है; पूरा लेनदेन प्रथम दृष्टया धोखाधड़ीपूर्ण है और इस स्तर पर आरोपियों को बरी नहीं किया जा सकता।”
CBI की जांच और आरोप
CBI के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री थे। इस दौरान उन्होंने IRCTC के दो होटलों — एक रांची और दूसरा पुरी में — की लीज प्रक्रिया में धांधली की और उन्हें सजाता होटल्स नामक निजी कंपनी को आवंटित किया।
एजेंसी का आरोप है कि इस सौदे के बदले में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से जुड़ी एक कंपनी को करोड़ों की जमीन बेहद सस्ते दामों पर दी गई।
CBI ने यह भी कहा कि सौदे की शर्तों में बदलाव कर पसंदीदा बोलीदाता (bidder) को लाभ पहुंचाया गया, जबकि रेलवे की कीमती संपत्तियों को प्रतिस्पर्धी बोली के नाम पर औपचारिकता मात्र में लीज पर दिया गया।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की, “टेंडर प्रक्रिया में स्पष्ट बदलाव किए गए। यह संभावना मजबूत है कि भूमि के मूल्य को कृत्रिम रूप से घटाकर बाद में उसे लालू यादव से जुड़े लोगों के नाम कर दिया गया।”
अदालत ने यह भी कहा कि लालू यादव पूरा घटनाक्रम जानते थे और उन्होंने होटलों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिससे सार्वजनिक धन को भारी नुकसान हुआ।
न्यायाधीश ने इस षड्यंत्र को “पद के दुरुपयोग का आदर्श उदाहरण” बताया।
यादव परिवार का पक्ष
लालू-राबड़ी-तेजस्वी परिवार ने आरोपों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए कहा है कि यह मामला साक्ष्यहीन है और इसका मकसद चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करना है।
फिर भी अदालत के आदेश से अब आरजेडी परिवार के खिलाफ पूर्ण आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। तेजस्वी यादव ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं और कानूनी रूप से अपना पक्ष रखते रहेंगे। ऐसे कदम चुनाव से पहले अपेक्षित थे, लेकिन बिहार की जनता सब समझती है।”
उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा, “लालू जी के कार्यकाल में रेलवे को ₹90,000 करोड़ का मुनाफा हुआ और हर बजट में किराया घटाया गया। हार्वर्ड और IIM जैसे संस्थानों के छात्र उनसे प्रबंधन सीखने आए थे। बिहार की जनता और पूरा देश सच्चाई जानता है।”
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