संसद में ‘शर्मनाक’ आचरण को लेकर बीजेपी ने विपक्ष पर साधा निशाना
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने शुक्रवार को संसद में विपक्षी दलों—कांग्रेस, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों के आचरण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे “शर्मनाक” करार देते हुए कहा कि कार्यवाही के दौरान किए गए उनके कृत्यों को लेकर आठ सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज नोटिस) का प्रस्ताव..
नयी दिल्ली। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने शुक्रवार को संसद में विपक्षी दलों—कांग्रेस, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों के आचरण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे “शर्मनाक” करार देते हुए कहा कि कार्यवाही के दौरान किए गए उनके कृत्यों को लेकर आठ सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज नोटिस) का प्रस्ताव दिया गया है।
दुबे ने कहा, “लोकतंत्र में इससे अधिक शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता कि कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी के सांसदों ने ऐसा आचरण किया। वे स्पीकर के सामने बैठने वाले सचिवालय कर्मचारियों की मेज पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे। वे हिंसक हो गए।”
विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए दुबे ने आगे कहा, “शायद बापू ने उन्हें यही सिखाया होगा। हो सकता है कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी की डिक्शनरी में यह लिखा हो कि बापू लोगों को हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाते थे।”
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के आदर्शों के अनुरूप सत्तापक्ष ने स्पीकर से संपर्क किया है। दुबे ने कहा, “बापू द्वारा सिखाए गए सत्य, अहिंसा और ईमानदारी के पाठ के अनुरूप, हमने 8 सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखा है।”
उन्होंने विपक्षी सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। दुबे ने कहा, “हम स्पीकर से मांग करेंगे कि यह सत्र आज ही समाप्त हो, लेकिन आगामी बजट सत्र तक इन सांसदों को सदन की कार्यवाही से बाहर रखा जाए। उनकी गतिविधियों से ऐसा लगता है कि वे सचिवालय कर्मचारियों की हत्या भी कर सकते हैं या हिंसा पर उतर सकते हैं। उन्हें मानसिक उपचार के लिए रांची या कांकेर भेजा जाना चाहिए…”
‘विकसित भारत’ विधेयक पर विपक्ष का हमला, सरकार पर ‘गांधी के नाम की हत्या’ का आरोप
इस बीच, कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने शुक्रवार को विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] विधेयक, 2025 के पारित होने की कड़ी आलोचना की और भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार पर “गांधी जी के नाम की हत्या” करने का आरोप लगाया।
भगत ने कहा, “उनके मूल संगठन ने 1948 में गांधी जी की हत्या की थी और कल मोदी जी की सरकार ने गांधी जी के नाम की हत्या कर दी। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें उन चीज़ों से एलर्जी है जिनमें गांधी जी और नेहरू जी के नाम आते हैं। वे उन नामों को हटाना चाहते हैं। स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने नकारात्मक भूमिका निभाई।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पहले की योजना पर निर्भरता को नजरअंदाज किया। भगत ने कहा, “इसीलिए वे ऐसा कर रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था इस योजना पर बहुत निर्भर थी… अगर सरकार चाहती तो खामियों को दूर कर उसमें सुधार कर सकती थी… लेकिन वे गांधी जी का नाम हटाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने ऐसा किया।”
विधेयक के पारित होने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सरकार पर कानून को जल्दबाजी में पारित करने तथा मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के लिए सुरक्षा प्रावधानों को कमजोर करने का आरोप लगाया। कई विपक्षी सांसदों ने कहा कि यह विधेयक मनरेगा की भावना को कमजोर करता है और पर्याप्त परामर्श के बिना संसद से पारित कराया गया।
संसद ने VB-G RAM G विधेयक को पारित कर दिया है। लोकसभा की मंजूरी के बाद राज्यसभा ने भी इसे स्वीकृति दे दी। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) को भेजने की मांग करते हुए राज्यसभा से वॉकआउट किया।
सरकार का बचाव
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि यह गरीबों के कल्याण में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान करने का आरोप भी लगाया।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
- यह विधेयक ग्रामीण परिवारों के लिए प्रति वर्ष 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी देता है, जो पहले 100 दिन थी। यह उन वयस्क सदस्यों के लिए है जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं।
- धारा 22 के अनुसार, केंद्र और राज्यों के बीच फंड साझा करने का अनुपात 60:40 होगा।
- उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों—जिनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं—के लिए यह अनुपात 90:10 होगा।
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