अमेरिकी सेना पर घातक हमले के जवाब में अमेरिका ने सीरिया में ISIS से जुड़े दर्जनों ठिकानों पर हमला किया
अमेरिका ने शुक्रवार को सीरिया में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिन्हें अमेरिकी सेना ने ISIS से जुड़ा बताया है। यह कार्रवाई हाल ही में हुए उस हमले के प्रतिशोध में की गई, जिसमें दो अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत हो गई..
वॉशिंगटन। अमेरिका ने शुक्रवार को सीरिया में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिन्हें अमेरिकी सेना ने ISIS से जुड़ा बताया है। यह कार्रवाई हाल ही में हुए उस हमले के प्रतिशोध में की गई, जिसमें दो अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत हो गई थी। इस जानकारी की पुष्टि दो अमेरिकी अधिकारियों ने की।
इस अभियान को “ऑपरेशन हॉकआई” नाम दिया गया है। यह नाम मारे गए दोनों सैनिकों के गृह राज्य आयोवा से प्रेरित है, जिसे “हॉकआई स्टेट” कहा जाता है। एक अधिकारी के अनुसार, इस अभियान के तहत सीरिया भर में ISIS से जुड़े दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें ढांचागत सुविधाएं और हथियार भंडारण केंद्र शामिल थे।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में इस कार्रवाई को “बदले की घोषणा” बताया।
उन्होंने लिखा, “यह किसी युद्ध की शुरुआत नहीं है—यह बदले की घोषणा है। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका अपने लोगों की रक्षा के लिए कभी हिचकेगा नहीं और कभी पीछे नहीं हटेगा।”
13 दिसंबर को हुए हमले के बाद, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक दुभाषिए की मौत हो गई थी, अमेरिका और उसके साझेदार बलों ने 10 अभियान चलाए। इन अभियानों में करीब 23 लोगों की मौत हुई या उन्हें हिरासत में लिया गया। अधिकारी ने बताया कि इन अभियानों के दौरान जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिली खुफिया जानकारी ने शुक्रवार के हमलों के लिए लक्ष्यों की पहचान करने में मदद की।
ISIS के खिलाफ लंबे समय से चल रहे अभियान के तहत सैकड़ों अमेरिकी सैनिक अब भी सीरिया में तैनात हैं। यह मिशन 2010 के दशक के मध्य में तब शुरू हुआ था, जब ISIS ने सीरिया और इराक के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य कार्रवाइयों तथा सीरिया में सत्ता परिवर्तन के चलते ISIS का क्षेत्रीय नियंत्रण काफी हद तक कमजोर हो गया।
CNN के अनुसार, ऑपरेशन हॉकआई का उद्देश्य सीरिया में मौजूद ISIS के बचे-खुचे तत्वों को बड़ा झटका देना और क्षेत्र में अमेरिकी बलों को खतरा पहुंचाने की उनकी क्षमता को कम करना है।
एक अधिकारी के मुताबिक, इन हमलों में जॉर्डन सहित कई साझेदार देशों ने भी हिस्सा लिया।
हालांकि ट्रंप प्रशासन ने 13 दिसंबर के हमले के बाद ISIS के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का वादा किया था, लेकिन सीरिया के गृह मंत्रालय ने कहा कि हमलावर सीरिया की आंतरिक सुरक्षा सेवा का हिस्सा था। अमेरिकी और सीरियाई अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया है कि हमलावर के ISIS से संबंध पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, और ISIS ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
मारे गए दोनों अमेरिकी सैनिकों की पहचान सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस तोवार (25), डेस मोइन्स, आयोवा, और सार्जेंट विलियम नथानिएल हॉवर्ड (29), मार्शलटाउन, आयोवा, के रूप में हुई है। अमेरिकी सेना के अनुसार, वे सीरिया के पाल्मायरा में शत्रु बलों से मुठभेड़ के दौरान मारे गए। दोनों आयोवा नेशनल गार्ड की 1st स्क्वाड्रन, 113th कैवेलरी रेजिमेंट, 2nd इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 34th इन्फैंट्री डिवीजन में तैनात थे।
इस हमले में आयोवा नेशनल गार्ड के तीन अन्य जवान भी घायल हुए, जिन्हें आगे के इलाज के लिए बाहर भेजा गया है।
आयोवा नेशनल गार्ड के एडजुटेंट जनरल मेजर जनरल स्टीफन ऑसबोर्न ने पहले कहा था, “इस समय हमारी प्राथमिकता हमारे शहीद और घायल सैनिकों के परिवारों का समर्थन करना है। पूरा आयोवा नेशनल गार्ड इस भयानक क्षति पर शोक व्यक्त करता है, और हम सैनिकों तथा उनके परिवारों के साथ एकजुट होकर खड़े हैं।”
गवर्नर किम रेनॉल्ड्स के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व के तहत इस वर्ष की शुरुआत में आयोवा नेशनल गार्ड के लगभग 1,800 जवानों ने मध्य पूर्व में तैनाती शुरू की थी।
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