बिहार में मतदान केंद्रों पर बुर्का जांच की मांग पर सियासत गर्म, डिप्टी सीएम बोले—‘घूंघट की जांच हो सकती है तो बुर्के की क्यों नहीं’
बिहार विधानसभा चुनावों से पहले बुर्का पहनने वाली मतदाताओं की पहचान की सख्त जांच की बीजेपी की मांग पर सियासत तेज हो गई है। इस पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रविवार को कहा कि पहले भी बुर्का और घूंघट दोनों में गलत या प्रॉक्सी वोटिंग के मामले सामने आए हैं, इसलिए जांच की मांग वाजिब..
पटना। बिहार विधानसभा चुनावों से पहले बुर्का पहनने वाली मतदाताओं की पहचान की सख्त जांच की बीजेपी की मांग पर सियासत तेज हो गई है। इस पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रविवार को कहा कि पहले भी बुर्का और घूंघट दोनों में गलत या प्रॉक्सी वोटिंग के मामले सामने आए हैं, इसलिए जांच की मांग वाजिब है।
उन्होंने कहा, “यह हमेशा बहस का विषय रहा है। पहले भी बुर्का या घूंघट पहनकर गलत मतदान हुआ है। सवाल यह है कि अगर ‘घूंघट’ उठाकर पहचान की जा सकती है, तो ‘बुर्का’ पहनने वालों की पहचान क्यों नहीं की जा सकती?”
सिन्हा ने आगे कहा कि देश में सभी महिलाओं की शक्ति का सम्मान किया जाता है, और यह शक्ति भगवती का रूप है, जिसे अपनी मताधिकार की जिम्मेदारी समझकर मतदान करना चाहिए।
बीजेपी की मांग: “बुर्का पहनने वाली महिलाओं की सख्त पहचान सुनिश्चित की जाए”
बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने शनिवार को पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के बाद कहा कि मतदान केंद्रों पर बुर्का पहनने वाली महिलाओं के चेहरे की पहचान को उनके EPIC कार्ड (मतदाता पहचान पत्र) से मिलान करना जरूरी है, ताकि फर्जी मतदान रोका जा सके।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि पहचान सत्यापन प्रक्रिया में समानता जरूरी है, जिससे केवल वास्तविक मतदाता ही मतदान कर सकें।
RJD का पलटवार: “राजनीतिक साजिश है, पहचान में कोई दिक्कत नहीं”
बीजेपी की इस मांग पर राजद (RJD) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजद सांसद अभय कुशवाहा ने कहा, “यह एक राजनीतिक साजिश है। नई मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के बाद सभी को ताज़ा पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं, इसलिए पहचान में कोई कठिनाई नहीं है। बीजेपी केवल ध्रुवीकरण की राजनीति करना चाहती है।”
राजद ने चुनाव आयोग से यह भी आग्रह किया कि संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान कर उनकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों से साझा की जाए, ताकि कमजोर वर्गों के मतदाताओं को भयमुक्त माहौल मिल सके।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
2024 लोकसभा चुनावों के दौरान भी बुर्का पहनने वाली महिलाओं की पहचान जांच को लेकर विवाद हुआ था।
दिल्ली और हैदराबाद में बीजेपी नेताओं ने फर्जी मतदान के आरोप लगाए थे। उस समय हैदराबाद की बीजेपी प्रत्याशी माधवी लता का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह मतदान केंद्र पर महिलाओं की पहचान जांचती हुई नजर आई थीं — जिसके बाद उन पर तीखी आलोचना हुई थी।
चुनाव आयोग की चुप्पी
फिलहाल चुनाव आयोग ने बिहार में बीजेपी की इस नई मांग पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा अब धार्मिक प्रतीकों बनाम चुनावी पारदर्शिता की बहस का केंद्र बन गया है।
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