32,000 शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने वाला आदेश कोलकाता हाईकोर्ट ने खारिज किया

कोलकाता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने बुधवार को वह फैसला खारिज कर दिया जिसमें (सेवानिवृत्त) न्यायमूर्ति अभिजीत गांगुली ने राज्य संचालित और राज्य सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त 32,000 शिक्षकों की नियुक्तियाँ रद्द कर दी..

32,000 शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने वाला आदेश कोलकाता हाईकोर्ट ने खारिज किया
04-12-2025 - 09:40 AM

कोलकाता। कोलकाता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने बुधवार को वह फैसला खारिज कर दिया जिसमें (सेवानिवृत्त) न्यायमूर्ति अभिजीत गांगुली ने राज्य संचालित और राज्य सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त 32,000 शिक्षकों की नियुक्तियाँ रद्द कर दी थीं।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अगले वर्ष पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। निर्णय से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को राहत मिलने की उम्मीद है, जो विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में कई भ्रष्टाचार मामलों के कारण राजनीतिक दबाव में रही है।

बुधवार दोपहर यह निर्णय न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति रीतोब्रतो कुमार मित्रा की डिवीजन बेंच ने सुनाया।

2023 में, न्यायमूर्ति गांगुली ने भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए 32,000 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था।
2014
में आयोजित टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) के बाद कुल 42,500 प्राथमिक शिक्षक नियुक्त किए गए थे। इनमें से 32,000 नियुक्तियों को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने रद्द कर दिया था।

अपने आदेश में न्यायमूर्ति गांगुली — जो अब सेवानिवृत्त होकर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं — ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करे और उसे तीन महीने के भीतर पूरा करे।

इससे पहले, मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के राज्य संचालित स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक नियुक्त 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को अवैध घोषित कर दिया था। ये नियुक्तियाँ स्कूल सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित स्टेट लेवल सेलेक्शन टेस्ट के बाद हुई थीं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में 25,000 से अधिक शिक्षकों की नौकरी चली गई। इनमें कई ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं जो पूरी तरह मेरिट पर चयनित हुए थे, और अब उनकी जीवन-यापन की स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि वे शिक्षकों के लिए जेल जाने को भी तैयार हैं। हालांकि टिप्पणी में यह भी कहा गया है कि ममता को जेल जाने की ज़रूरत नहीं, बल्कि उन्हें सिर्फ इतना करना चाहिए कि हजारों परिवारों को आर्थिक बर्बादी से बचाने के लिए उपयुक्त कदम उठाएँ।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।