कोर्ट ने राहुल गांधी से कहा, जिन आदेशों को चुनौती नहीं दी, उन पर टिप्पणी न करें..!
पुणे की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को निर्देश दिया है कि वे ऐसे किसी भी न्यायिक आदेश पर टिप्पणी न करें, जिसे उन्होंने अभी तक चुनौती नहीं दी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी नवीनतम अर्जी में ऐसे टिप्पणीपूर्ण अभिव्यक्तियाँ शामिल हैं, जो उस समन आदेश से संबंधित थीं जिसे न तो उन्होंने स्वीकार किया है और न ही उसके खिलाफ कोई चुनौती दायर..
पुणे। पुणे की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को निर्देश दिया है कि वे ऐसे किसी भी न्यायिक आदेश पर टिप्पणी न करें, जिसे उन्होंने अभी तक चुनौती नहीं दी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी नवीनतम अर्जी में ऐसे टिप्पणीपूर्ण अभिव्यक्तियाँ शामिल हैं, जो उस समन आदेश से संबंधित थीं जिसे न तो उन्होंने स्वीकार किया है और न ही उसके खिलाफ कोई चुनौती दायर की है।
मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे ने कहा, “यदि आरोपी (गांधी) को समन आदेश जारी किए जाने पर कोई आपत्ति है, तो उन्हें उपयुक्त न्यायालय में इसे चुनौती देनी चाहिए। लेकिन वे ऐसे आदेश पर टिप्पणी नहीं कर सकते जिसे उन्होंने चुनौती नहीं दी है। या तो वे आदेश स्वीकार करें या फिर उसे उचित न्यायालय में चुनौती दें। इसलिए यह अदालत निर्देश देती है कि आरोपी किसी भी ऐसे आदेश पर टिप्पणी न करें जो अंतिम हो चुका है या जिसे चुनौती नहीं दी गई है।”
यह मामला विनायक दामोदर सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर की ओर से दायर मानहानि शिकायत से जुड़ा है। कांग्रेस नेता द्वारा हिंदुत्व विचारक सावरकर के संबंध में दिए गए कथित अपमानजनक बयान के आधार पर शिकायत दायर की गई थी। प्रस्तुत सामग्री का परीक्षण करने के बाद अदालत ने प्रक्रिया जारी करते हुए राहुल गांधी को समन किया था।
हाल ही में, सत्यकी सावरकर के मुख्य-परीक्षण के दौरान अदालत उस सीडी को चलाने वाली थी जिसमें गांधी के भाषण का वीडियो मौजूद था और जिसे पहले मजिस्ट्रेट ने देखा था।
लेकिन अदालत में सीलबंद रखी गई वह सीडी खाली पाई गई। इस पर सत्यकी सावरकर के वकील, संग्राम कोल्हटकर ने स्थगन की मांग की और यह जानने के लिए न्यायिक जांच की मांग की कि पहले वीडियो वाली सीडी अब खाली कैसे हो गई।
गांधी के वकील, मिलिंद पवार ने स्थगन की मांग का विरोध किया और अपने लिखित जवाब में कुछ ऐसे टिप्पणियाँ कीं, जिन पर कोल्हटकर ने आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी ने अदालत पर अवांछित टिप्पणी की है और इसके बाद उन्होंने 27 नवंबर को दायर गांधी की अर्जी के दो पैरा स्पष्ट करने के लिए एक आवेदन दिया।
कोल्हटकर ने तर्क दिया कि गांधी के बयान गंभीर प्रकृति के हैं और शिकायतकर्ता के आचरण पर कीचड़ उछालने जैसे हैं।
उन्होंने कहा, “इन टिप्पणियों से एक निष्पक्ष न्यायिक प्रणाली के कामकाज पर भी सवाल खड़ा होता है। पैराग्राफ 11 में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने किसी ठोस सामग्री के अभाव में समन जारी करवाने में सफलता पाई।” उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि गांधी ने अदालत की कार्यप्रणाली पर "गंभीर संदेह" दर्शाए हैं, जबकि पूर्व मजिस्ट्रेट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सभी साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद ही प्रक्रिया जारी की थी। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह गांधी से इस पर स्पष्टीकरण मांगे।
पवार ने जवाब दिया कि अदालत के पास किसी आरोपी से इस प्रकार का स्पष्टीकरण मांगने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने सावरकर के आवेदन को विलंब करने की रणनीति बताया। साथ ही, उन्होंने सांसदों एवं विधायकों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सावरकर के आवेदन का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि गांधी या तो समन आदेश को स्वीकार करें या उपयुक्त कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे चुनौती दें लेकिन जिस आदेश को उन्होंने चुनौती नहीं दी है, उस पर टिप्पणी नहीं कर सकते।
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