इमरजेंसी पर कॉलम लिखने से थरूर कांग्रेस के निशाने पर आये, पार्टी ने कहा कि "पहले तय करें आप किस पार्टी के हैं.."
2026 के केरल विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी और उसके वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के बीच तनाव उस समय उभर आया जब एक सर्वेक्षण में थरूर को केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे लोकप्रिय चेहरा बताया गया, साथ ही एक कॉलम में इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों की थरूर द्वारा आलोचना ने मामला..
तिरुवनंतपुरम। 2026 के केरल विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी और उसके वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के बीच तनाव उस समय उभर आया जब एक सर्वेक्षण में थरूर को केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे लोकप्रिय चेहरा बताया गया, साथ ही एक कॉलम में इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों की थरूर द्वारा आलोचना ने मामला और संवेदनशील बना दिया।
गुरुवार को मलयालम दैनिक 'दीपिका' में प्रकाशित एक कॉलम में थरूर ने आपातकाल (1975-77) के दौरान की गई कार्रवाईयों को "अवर्णनीय क्रूरता" बताया। इस लेख का संक्षिप्त संस्करण 8 जुलाई को Project Syndicate में ‘Heeding the Lessons of India’s Emergency’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ था।
थरूर ने लिखा, "‘अनुशासन’ और ‘व्यवस्था’ की तलाश अक्सर अत्याचार में बदल गई, जिसका उदाहरण है संजय गांधी द्वारा चलाई गई जबरन नसबंदी अभियान। ये अभियान गरीब और ग्रामीण इलाकों में ज़बरदस्ती और हिंसा से संचालित किए गए। दिल्ली जैसे शहरी इलाकों में की गई झुग्गी बस्तियों की बेरहमी से की गई तोड़फोड़ ने हजारों को बेघर कर दिया, उनके कल्याण की कोई चिंता नहीं की गई।"
थरूर ने आगे लिखा, "हमें आपातकाल को केवल अंधकारमय अध्याय कहने तक सीमित न रहते हुए उससे सबक लेने चाहिए। हमें यह पूछना चाहिए कि क्या हम किसी तानाशाह के उदय को समय रहते पहचान सकेंगे? क्या हम मीडिया और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं की रक्षा के लिए पर्याप्त कर रहे हैं?"
गौरतलब है कि शशि थरूर अगस्त 2023 से कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) के सदस्य हैं।
पार्टी नेताओं की नाराज़गी – "पहले तय करें किस पार्टी में हैं"
जब थरूर ने एक प्राइवेट एजेंसी के सर्वेक्षण को X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया, जिसमें उन्हें UDF के मुख्यमंत्री पद का सबसे पसंदीदा चेहरा बताया गया, तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनकी निष्ठा पर सवाल उठा दिए।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन ने कहा, "पहले थरूर यह तय करें कि वो किस पार्टी में हैं।"
उन्होंने कहा कि "UDF अगर सत्ता में आती है, तो मुख्यमंत्री वही बनेगा जो राज्य में 24 घंटे काम कर रहा है। थरूर एक अंतरराष्ट्रीय व्यक्ति हैं, हमें ऐसा नेता चाहिए जो राज्य को जानता हो। थरूर को दुनिया की राजनीति देखने दें, हम राज्य का देख लेंगे।"
थरूर के लेख पर भी उठे सवाल
मुरलीधरन ने कहा कि "पार्टी नेताओं की राय है कि केवल आपातकाल के दौरान की घटनाएं नहीं, बल्कि उसकी पृष्ठभूमि पर भी चर्चा की जानी चाहिए।"
उन्होंने यह भी कहा कि "केरल आपातकाल से प्रभावित नहीं हुआ था। कांग्रेस ने उन राज्यों में चुनाव जीते थे, जहां आपातकाल को ठीक से लागू किया गया था – जिसमें केरल भी शामिल था।"
कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि उन्होंने थरूर का लेख पढ़ा नहीं है और उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि किसी सांसद और वर्किंग कमिटी के सदस्य को ऐसा लेख लिखने की आवश्यकता थी। मुझे भरोसा नहीं हो रहा कि उन्होंने इंदिरा गांधी और संजय गांधी के खिलाफ लिखा।"
चेन्निथला ने इस सर्वेक्षण को "BJP की साजिश" बताते हुए कहा कि इसका मकसद UDF और मतदाताओं के बीच भ्रम फैलाना है। उन्होंने कहा, "ऐसे सर्वे चुनावों के दौरान होते रहते हैं। इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।"
सर्वेक्षण में क्या बताया गया?
यह सर्वे प्राइवेट रिसर्च एजेंसी ‘Vote Vibes’ द्वारा किया गया और इसका शीर्षक था: ‘State Vibes: Kerala Elections 2026’। इसके अनुसार..
- 28.3% उत्तरदाताओं ने थरूर को UDF के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में चुना।
- 15.4% ने विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन को।
- 8.2% ने चेन्निथला, और
- 6% ने मुरलीधरन को पसंद किया।
वहीं LDF खेमे में
- के.के. शैलजा को 24.2%, और
- मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को 17.5% समर्थन मिला।
सर्वे में यह भी पाया गया कि..
- 47.9% उत्तरदाताओं ने केरल में "बहुत ज्यादा एंटी-इनकम्बेंसी" (सरकार विरोधी लहर) बताई।
- महिलाओं में यह प्रतिशत 43% और पुरुषों में 39% था।
NDA को 23.1% समर्थन मिला, जबकि UDF को 38.9% और LDF को 27.8%। हालांकि सर्वे एजेंसी ने सैंपल साइज़ या पद्धति की जानकारी नहीं दी।
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