"घृणा फैलाने से कुछ हासिल नहीं होता": सुप्रीम कोर्ट ने वजाहत खान की बंगाल के बाहर गिरफ्तारी पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनौली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले मुख्य शिकायतकर्ता वजाहत खान की पश्चिम बंगाल के बाहर दर्ज सभी एफआईआरों में गिरफ्तारी पर रोक..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनौली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले मुख्य शिकायतकर्ता वजाहत खान की पश्चिम बंगाल के बाहर दर्ज सभी एफआईआरों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
वजाहत खान के वकील संखजित लाल मित्रा ने इंडिया टुडे को बताया, "माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सभी एफआईआरों पर रोक लगा दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि अगले आदेश तक उनके खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं की जा सकती।"
न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किया और केंद्र सरकार के साथ असम, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर खान की याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एकसाथ जोड़ने की मांग की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।
न्यायमूर्ति की सख्त टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने खान की सोशल मीडिया पोस्ट्स पर कड़ी मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "एक प्रसिद्ध तमिल कहावत है — आग से लगी चोट ठीक हो सकती है, लेकिन जुबान से लगी चोट नहीं।"
उन्होंने आगे कहा, “इन घृणा भरे भाषणों से कोई लाभ नहीं होता। “क्या हिंसा केवल शारीरिक ही होनी चाहिए? यह मौखिक भी हो सकती है।”
क्या है मामला?
वजाहत खान पर सोशल मीडिया पर ऐसा सामग्री पोस्ट करने का आरोप है जिससे नफरत और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलता है। उनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। वह पहले से ही पश्चिम बंगाल में दो अलग-अलग एफआईआरों में पुलिस और न्यायिक हिरासत में हैं।
कोलकाता पुलिस ने 9 जून को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया था। हालांकि, असम, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों की पुलिस भी उन्हें अपनी हिरासत में लेने की मांग कर रही है क्योंकि वहां भी इसी तरह की एफआईआर दर्ज हैं।
पनौली की गिरफ्तारी से जुड़ा है मामला
खान के वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ की गई एफआईआर दरअसल शर्मिष्ठा पनौली के खिलाफ दर्ज की गई उनकी शिकायत के बदले में दर्ज की गई हैं। पनौली पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले एक वीडियो को पोस्ट करने का आरोप है, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम ज़मानत दे दी थी।
"यह बहुत चिंताजनक है": सुप्रीम कोर्ट
न्यायालय ने खान की टिप्पणियों पर चिंता जताते हुए कहा, “हम चिंतित हैं कि यह सब किस दिशा में जा रहा है।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार के बयान संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के अंतर्गत सुरक्षा प्राप्त नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने यह भी टिप्पणी की, “साफ तौर पर नफ़रत फैलाने वाली बातें हैं ये।”
यह टिप्पणी तब आई जब अदालत को बताया गया कि खान ने विवादित पोस्ट को हटा दिया था और एफआईआर दर्ज होने से पहले ही माफी भी मांग ली थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता डामा सेषाद्रि नायडू, जो खान की ओर से अदालत में उपस्थित थे, ने कहा कि खान “शायद अब वही काट रहे हैं जो उन्होंने बोया था” और उनका उद्देश्य केवल एफआईआरों का एकीकरण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खान पहले ही माफी मांग चुके हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
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