आईएएफ की युद्धकालीन एयरस्ट्रिप फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए बेची गई, 28 साल बाद केस दर्ज
जालसाजी की एक ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसमें भारतीय वायुसेना (IAF) की एक अत्यंत रणनीतिक और ऐतिहासिक एयरस्ट्रिप को फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए बेच दिया गया। यह एयरस्ट्रिप 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में अग्रिम हवाई अड्डे ..
फिरोजपुर। जालसाजी की एक ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसमें भारतीय वायुसेना (IAF) की एक अत्यंत रणनीतिक और ऐतिहासिक एयरस्ट्रिप को फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए बेच दिया गया। यह एयरस्ट्रिप 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में अग्रिम हवाई अड्डे (Advanced Landing Ground) के रूप में इस्तेमाल की गई थी।
यह घटना 1997 में पंजाब के फिरोजपुर जिले के फत्तूवाला गांव में घटित हुई, जो पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है। उषा अंसल और उनके बेटे नवीन चंद, निवासी डूमनीवाला गांव, ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर वायुसेना की इस ज़मीन को अपना बताकर बेच डाला।
28 साल बाद दर्ज हुआ मामला
अब लगभग 28 साल बाद, इस गहरे जालसाजी के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई है, जिसने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (VB) को जांच के आदेश दिए थे।
20 जून, 2025 को दाखिल हुई जांच रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज किया गया है। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्न धाराएं लगाई गई हैं:
- 419 – छद्म व्यक्तित्व के जरिए धोखाधड़ी
- 420 – धोखाधड़ी और संपत्ति की अनुचित डिलीवरी कराना
- 465 – जालसाजी
- 467 – मूल्यवान सुरक्षा दस्तावेज, वसीयत आदि की जालसाजी
- 471 – जाली दस्तावेज को असली बताकर प्रयोग करना
- 120बी – आपराधिक साजिश
डीएसपी करन शर्मा इस मामले की जांच की अगुवाई कर रहे हैं। उनका कार्य है सभी संबंधित व्यक्तियों की पहचान करना जो इस बहुपरत घोटाले में शामिल हैं।
वायुसेना की ज़मीन को बना दिया निजी संपत्ति
विजिलेंस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह ज़मीन 12 मार्च 1945 को ब्रिटिश शासन द्वारा अधिग्रहित की गई थी और द्वितीय विश्व युद्ध में प्रयोग के लिए आरक्षित थी। तब से लेकर अब तक यह वायुसेना के नियंत्रण में रही और तीन युद्धों में उपयोग की गई।
लेकिन जांच में सामने आया कि उषा अंसल और उनके बेटे नवीन चंद ने फर्जी दस्तावेज़ बनाकर इस ज़मीन को अपनी बताकर बेच दिया। इसमें उन्हें कुछ राजस्व अधिकारियों का भी समर्थन मिला, जिन्होंने रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की।
मई 2025 में ज़मीन की हुई वापसी
यह ज़मीन मई 2025 में अदालत के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार रक्षा मंत्रालय को वापस सौंपी गई।
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