‘भारत अमेरिका में पैसा लाता है, पाकिस्तान नहीं’: अमेरिकी सांसद ने खींची लाल रेखा, नई दिल्ली का किया समर्थन
नयी दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर संबंधों में तनाव के बीच, अमेरिकी कांग्रेस सदस्य रिच मैककॉर्मिक ने कहा है कि भारत के विपरीत पाकिस्तान अमेरिका में निवेश नहीं लाता। उन्होंने यह टिप्पणी 12 जनवरी को सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में..
नयी दिल्ली/वॉशिंगटन। नयी दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर संबंधों में तनाव के बीच, अमेरिकी कांग्रेस सदस्य रिच मैककॉर्मिक ने कहा है कि भारत के विपरीत पाकिस्तान अमेरिका में निवेश नहीं लाता। उन्होंने यह टिप्पणी 12 जनवरी को सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में की।
मैककॉर्मिक ने कहा, “पाकिस्तान 30 करोड़ की आबादी वाला देश है लेकिन आप उसे अमेरिका में निवेश लाते हुए नहीं देखते। भारत न केवल निवेश लेता है बल्कि वह अमेरिका में निवेश भी लाता है।” मैककॉर्मिक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत एक राष्ट्र के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में खुद को एक “प्रभावशाली (डोमिनेंट) देश” के तौर पर स्थापित कर रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत का “मध्य वर्ग” अब वैश्विक बाजार पर प्रभाव डालना शुरू कर चुका है। इसके साथ ही, अमेरिका को भारत से मिलने वाली प्रतिभा (टैलेंट) की आपूर्ति को भी उन्होंने बेहद अहम बताया।
मैककॉर्मिक ने कहा, “प्रतिभा मायने रखती है और भारत भारी मात्रा में प्रतिभा उपलब्ध करा रहा है..सिर्फ प्रतिभाशाली लोगों के निर्यात के रूप में ही नहीं बल्कि उन क्षेत्रों में भी जहां वे अपनी भूमिका निभा रहे हैं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका यदि भारत जैसे देश को खुद से दूर करता है, तो वह “बड़ी परेशानी” में पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका भारतीयों को दोस्त के रूप में अपनाता है, तो शांति और समृद्धि आएगी। अगर हम उन्हें अलग-थलग करते हैं, तो यह हम सभी के लिए बड़ी मुसीबत साबित होगी।”
भारत–अमेरिका व्यापार संबंध
भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते पिछले साल से तनावपूर्ण बने हुए हैं। वर्ष 2025 में भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के चलते कुल 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए गए थे। अमेरिका का मानना है कि इससे यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस की अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलता है।
हालांकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर लगातार बातचीत जारी रही है, लेकिन हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी, जिसमें रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
इसके अलावा, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में सुझाव दिया कि एक अहम द्विपक्षीय व्यापार समझौता इसलिए आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया।
इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने लुटनिक के बयान को “तथ्यात्मक रूप से सही नहीं” बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका 13 फरवरी पिछले वर्ष से ही एक व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं।
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