NIA की मांग: यासीन मलिक की उम्रकैद को फांसी में बदला जाए

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दलील देते हुए कश्मीरी अलगाववादी Yasin Malik की उम्रकैद की सजा को बढ़ाकर मृत्युदंड (फांसी) करने की मांग की। यह मामला आतंकी फंडिंग से जुड़ा..

NIA की मांग: यासीन मलिक की उम्रकैद को फांसी में बदला जाए
24-04-2026 - 08:45 AM

नयी दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दलील देते हुए कश्मीरी अलगाववादी Yasin Malik की उम्रकैद की सजा को बढ़ाकर मृत्युदंड (फांसी) करने की मांग की। यह मामला आतंकी फंडिंग से जुड़ा हुआ है।

NIA ने अदालत में कहा कि वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों के नाम लेने से मलिक की जिम्मेदारी कम नहीं होती और न ही उनके आतंकियों से संबंध कमजोर पड़ते हैं। एजेंसी ने दावा किया कि मलिक के संबंध Hafiz Saeed और Syed Salahuddin जैसे पाकिस्तान-आधारित आतंकियों से थे।

मलिक के हलफनामे के जवाब में NIA ने कहा कि 60 वर्षीय Jammu and Kashmir Liberation Front (JKLF) प्रमुख कई आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थे और उन्होंने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने और सहानुभूति हासिल करने के लिए राजनेताओं, मीडिया कर्मियों, विदेशी प्रतिनिधियों और नौकरशाहों के नामों का इस्तेमाल किया।

एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह मामला ठोस सबूतों पर आधारित है, न कि सुनी-सुनाई बातों या भावनात्मक बयानबाजी पर। NIA ने यह भी दावा किया कि मलिक पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सांसदों और प्रांतीय मुख्यमंत्रियों—से संपर्क में थे और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी एजेंडा को बढ़ावा दे रहे थे।

NIA ने अदालत से कहा कि दोषसिद्धि के बाद अब मलिक इस मामले को दोबारा नहीं उठा सकते, क्योंकि ट्रायल के दौरान उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका मिला था।

इस मामले की सुनवाई Delhi High Court की जस्टिस Navin Chawla और Ravinder Dudeja की बेंच ने की। अदालत ने NIA की दलील को रिकॉर्ड में लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई के लिए तय की। मलिक तिहाड़ जेल से वर्चुअल माध्यम से पेश हुए।

इससे पहले मलिक ने दावा किया था कि उन्होंने लगभग तीन दशकों तक सरकार के बैकचैनल प्रयासों में भाग लिया और जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए कई प्रधानमंत्रियों, खुफिया अधिकारियों और व्यापारिक हस्तियों के साथ काम किया। उनके 85 पन्नों के हलफनामे में उनके जीवन, उग्रवाद से जुड़ाव और कथित राजनीतिक संपर्कों का जिक्र है।

NIA ने कहा कि मलिक खुद मान चुके हैं कि वह JKLF के कमांडर-इन-चीफ थे और उनके आतंकियों से संबंध रहे हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने 24 मई 2022 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।