नेपाल में राजतंत्र की वापसी के लिए प्रदर्शनों का जोर: क्या नेपाल फिर से राजशाही की ओर बढ़ रहा है?

नेपाल में इन दिनों हो रहे प्रदर्शन संकेत दे रहे हैं कि यह हिमालयी राष्ट्र एक बड़े मोड़ यानी राजतंत्र की वापसी और एक हिंदू राष्ट्र बनने की राह पर खड़ा है।

नेपाल में राजतंत्र की वापसी के लिए प्रदर्शनों का जोर: क्या नेपाल फिर से राजशाही की ओर बढ़ रहा है?
01-04-2025 - 12:45 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

काठमांडू। नेपाल में इन दिनों हो रहे प्रदर्शन संकेत दे रहे हैं कि यह हिमालयी राष्ट्र एक बड़े मोड़ यानी राजतंत्र की वापसी और एक हिंदू राष्ट्र बनने की राह पर खड़ा है। काठमांडू की सड़कों पर प्रो-मोनार्की (राजतंत्र समर्थक) प्रदर्शनकारी भारी संख्या में उमड़ रहे हैं, जो इस बात को और अधिक अजीब बना देते हैं कि, 2008 में माओवादियों द्वारा राजतंत्र को समाप्त कर दिया गया था और अब एक पूर्व माओवादी गेरिल्ला नेता दुर्गा प्रसाई ने इसे फिर से बहाल करने के लिए आंदोलन शुरू किया है।

राजतंत्र का अंत और पुनरुद्धार की मांग

नेपाल ने माओवादियों की मदद से 2008 में राजतंत्र को समाप्त कर दिया था। माओवादियों का मानना था कि नेपाल को एक प्रजातांत्रिक गणराज्य की आवश्यकता है, जिसमें राजा की सत्ता समाप्त हो। किंग ज्ञानेन्द्र शाह को इस आंदोलन के कारण सिंहासन छोड़ना पड़ा, और माओवादियों की सहायता से एक लोकतांत्रिक प्रणाली स्थापित हुई थी।

लेकिन अब, प्रसाई के नेतृत्व में प्रो-मोनार्की आंदोलन तेजी से फैल रहा है। प्रदर्शनकारी राजतंत्र की वापसी और नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग कर रहे हैं। हालाँकि नेपाल में माओवादियों ने सरकार का गठन किया और शाही व्यवस्था को समाप्त किया, अब प्रसाई जैसे नेता अपने पुराने विरोधियों के खिलाफ खड़े होकर राजतंत्र की बहाली की बात कर रहे हैं।

नेपाल में 17 सालों में 13 सरकारें और लगातार अस्थिरता

राजतंत्र के खात्मे के बाद से नेपाल में अस्थिरता बनी रही है। पिछले 17 वर्षों में नेपाल ने 13 सरकारें देखी हैं, और इन सरकारों के खिलाफ लगातार भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था में मंदी की शिकायतें उभरी हैं। इन परिस्थितियों में, प्रो-मोनार्की आंदोलन ने फिर से जोर पकड़ लिया है।

प्रसाई की भूमिका और उनका ऐतिहासिक संदर्भ

दुर्गा प्रसाई, जो कभी माओवादियों के साथ थे, अब राजतंत्र की वापसी के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रसाई ने 2017 में माओवादियों और सीपीएन-यूएमएल (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) के नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद से वे नेपाल में भ्रष्टाचार और राजनीतिक विफलताओं पर आक्रामक रूप से बोल रहे हैं।

प्रसाई का कहना है कि राजतंत्र की वापसी ही एकमात्र उपाय है, जो नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट को खत्म कर सकता है।

प्रदर्शनकारी कहते हैं- 'राजा वापस आओ, देश को बचाओ'

प्रदर्शनकारियों का कहना है, "राजा वापस आओ, देश को बचाओ।" और ज्ञानेन्द्र शाह की वापसी के समर्थन में वे नारे लगा रहे हैं, "हमारे प्यारे राजा की लंबी उम्र हो।"

हालांकि, ज्ञानेन्द्र शाह को 2008 में सिंहासन छोड़ने के बाद से नारायणहिटी महल से बाहर कर दिया गया था, अब जनता फिर से उन्हें वापस लाने की मांग कर रही है। इन प्रदर्शनकारियों का मानना है कि राजतंत्र की वापसी से नेपाल को स्थिरता और प्रगति मिल सकती है।

संघर्ष का एक नया अध्याय

राजतंत्र की वापसी के लिए आंदोलन के अलावा, नेपाल में पिछले सालों में घातक संघर्षों और प्रदर्शनकारियों की मौत की घटनाएं भी हो चुकी हैं। हाल ही में काठमांडू में हुए राजतंत्र समर्थक प्रदर्शनों में दो लोगो

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।