राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए: संसद में आचरण को लेकर 204 पूर्व सैन्य अधिकारियों व वरिष्ठों का खुला पत्र
नागरिकों को संबोधित एक खुले पत्र में 204 सेवानिवृत्त अधिकारियों जिनमें सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिक, पूर्व नौकरशाह और वरिष्ठ वकील शामिल हैं, ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों के 12 मार्च को संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान आचरण पर गंभीर चिंता..
नागरिकों को संबोधित एक खुले पत्र में 204 सेवानिवृत्त अधिकारियों जिनमें सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिक, पूर्व नौकरशाह और वरिष्ठ वकील शामिल हैं, ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों के 12 मार्च को संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान आचरण पर गंभीर चिंता जताई।
पत्र में कहा गया कि संसद की गरिमा “संवैधानिक व्यवस्था का एक मूल तत्व” है और सभी सदस्यों को संसद के हर हिस्से—सीढ़ियों, गलियारों और लॉबी—में उच्चतम मर्यादा और सम्मान बनाए रखना चाहिए।
12 मार्च की घटना पर उठाए सवाल
पूर्व अधिकारियों के अनुसार 12 मार्च की घटनाएं “गंभीर रूप से चिंताजनक” थीं। उन्होंने कहा कि स्पीकर द्वारा संसद परिसर में किसी भी तरह के प्रदर्शन या विरोध पर स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद राहुल गांधी और कई अन्य सांसदों ने इस निर्देश की अवहेलना की।
इसे उन्होंने “संसदीय अधिकार की जानबूझकर अनदेखी” बताया और आरोप लगाया कि विपक्ष ने “संवैधानिक संस्था की गरिमा से ऊपर व्यक्तिगत राजनीतिक नाटकीयता” को रखा।
संसद की सीढ़ियों पर प्रदर्शन पर आपत्ति
पत्र में यह भी कहा गया कि राहुल गांधी और अन्य सांसद “संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्कुट लेते हुए दिखाई दिए, जो देश की सर्वोच्च विधायी संस्था के सदस्यों के लिए बिल्कुल अनुचित है।”
पूर्व अधिकारियों ने कहा कि संसद की सीढ़ियां “राजनीतिक नाटक या प्रदर्शन का मंच नहीं हैं” और इस तरह का व्यवहार “अहंकार, विशेषाधिकार की भावना और संसद के प्रति सम्मान की कमी” को दर्शाता है।
सार्वजनिक संवाद के स्तर पर भी सवाल
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने बार-बार ऐसे व्यवहार से “सार्वजनिक संवाद और शिष्टाचार के स्तर को गिराया” है। हस्ताक्षरकर्ताओं के अनुसार यह आचरण “व्यक्तिगत विशेषाधिकार की भावना” से प्रेरित लगता है, न कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान से।
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां संसदीय कार्यवाही में बाधा डालती हैं और “जनता के समय व संसाधनों की बर्बादी” का कारण बनती हैं।
माफी और आत्ममंथन की मांग
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया, “श्री राहुल गांधी को इस व्यवहार के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए और उस सोच पर आत्ममंथन करना चाहिए, जिसने इस आचरण को जन्म दिया।”
पूर्व अधिकारियों ने चेतावनी दी कि इस तरह का व्यवहार “देश और लोकतंत्र की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है” और नेता प्रतिपक्ष से संसद की गरिमा और अधिकार बनाए रखने की अपील की।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की अपील
पत्र के अंत में पूर्व अधिकारियों ने भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया और कहा कि “लोकतंत्र के मंदिर” को अहंकार या विशेषाधिकार की भावना से कमजोर नहीं होने देना चाहिए।
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