भाजपा विधायक टी राजा सिंह के नाटकीय इस्तीफे से तीन वरिष्ठ नेता नाराज़; शोभा करंदलाजे, सुनील बंसल और अभय पाटिल उनके सार्वजनिक हमले से खफा
भाजपा विधायक टी. राजा सिंह ने भले ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। पर्दे के पीछे, उनके इस नाटकीय कदम ने पार्टी के शीर्ष स्तर पर हलचल मचा दी है..
हैदराबाद। भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने भले ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। पर्दे के पीछे, उनके इस नाटकीय कदम ने पार्टी के शीर्ष स्तर पर हलचल मचा दी है और खासतौर पर तीन प्रमुख नेताओं.. सुनील बंसल, अभय पाटिल, और केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को बेहद नाराज़ कर दिया है।
मामला कब भड़का?
सूत्रों के अनुसार, यह टकराव तब सामने आया जब तेलंगाना भाजपा इकाई के अध्यक्ष पद के नामांकन के दिन राजा सिंह अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और वहां जमकर सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने उनका नामांकन रोक दिया और इसकी जगह एन. रामचंदर राव को समर्थन दिया गया, जो बाद में बिना विरोध निर्वाचित हो गए।
शोभा करंदलाजे का पलटवार
चुनाव अधिकारी की भूमिका में रहीं केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे राजा सिंह के आरोपों से बेहद नाराज़ नजर आईं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अगर वह वाकई राजा सिंह को रोकना चाहतीं, तो उन्हें नामांकन पत्र ही क्यों देतीं? उन्होंने यह भी बताया कि राजा सिंह केवल तीन प्रस्तावक जुटा पाए, जबकि नामांकन के लिए कम से कम 10 प्रस्तावकों की जरूरत होती है और इसी वजह से उनका नामांकन रद्द हो गया।
सुनील बंसल और अनुशासन का सवाल
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और तेलंगाना मामलों के प्रभारी सुनील बंसल ने कथित तौर पर टिप्पणी की कि राजा सिंह की बार-बार की अनुशासनहीनता अब सहन की सीमा पार कर चुकी है। यह रुख पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया में भी नजर आया, जिससे संकेत मिलता है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
पार्टी से दूरी और संभावित उपचुनाव
पार्टी सूत्रों का कहना है कि राजा सिंह काफी समय से तेलंगाना भाजपा इकाई से दूरी बनाए हुए थे और पार्टी कार्यक्रमों या बैठकों में शिरकत नहीं करते थे। उनका इस्तीफा अब तक विधानसभा अध्यक्ष को प्रेषित नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि अगर केंद्रीय नेतृत्व इसे स्वीकार कर लेता है, तो उन्हें विधायक पद से अयोग्य करार दिया जा सकता है — जिससे गोशामहल सीट पर उपचुनाव जरूरी हो जाएगा।
हिंदुत्व पर अडिग, लेकिन राजनीतिक भविष्य अधर में
फिलहाल, राजा सिंह के समर्थक जोर देकर कह रहे हैं कि वह पार्टी से ऊपर हिंदुत्व के प्रति निष्ठा रखते हैं और इस्तीफे के बाद से उन्होंने किसी प्रतिद्वंद्वी दल से संपर्क नहीं किया है। उनके एक करीबी सहयोगी ने बताया, “वह केंद्रीय नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।” यह दर्शाता है कि राजा सिंह की वैचारिक प्रतिबद्धता बरकरार है, भले ही उनका राजनीतिक भविष्य अनिश्चित हो।
What's Your Reaction?