अब आम आदमी पार्टी ने कहा.. पीएम, सीएम हटाने वाले बिलों पर गठित जेपीसी में शामिल नहीं होंगे

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बाद अब आम आदमी पार्टी (आप) ने भी रविवार को घोषणा की कि वह प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने से जुड़े तीन विधेयकों की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का हिस्सा नहीं

अब आम आदमी पार्टी ने कहा.. पीएम, सीएम हटाने वाले बिलों पर गठित जेपीसी में शामिल नहीं होंगे
25-08-2025 - 11:52 AM
25-08-2025 - 12:11 PM

नयी दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बाद अब आम आदमी पार्टी (आप) ने भी रविवार को घोषणा की कि वह प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने से जुड़े तीन विधेयकों की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का हिस्सा नहीं बनेगी। पार्टी ने आरोप लगाया कि इन विधेयकों का मकसद विपक्षी सरकारों को "गिराना" है।

राज्यसभा में टीएमसी के नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने रविवार को कहा कि यह जेपीसी "बेमानी" है।
उन्होंने एक्स (X) पर लिखा – मोदी गठबंधन के इस संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाने के ड्रामे को अब और भी पार्टियाँ बेनकाब कर रही हैं। यह जेपीसी बेमूल्य है।”

आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी ने जेपीसी में कोई सदस्य नहीं भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंने एक्स पर हिंदी में पोस्ट किया – भ्रष्टाचार के नेता भला भ्रष्टाचार के खिलाफ बिल कैसे ला सकते हैं? विपक्षी नेताओं को झूठे मामलों में फंसाना, जेल में डालना और सरकारें गिराना – यही इस बिल का उद्देश्य है। यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल जी और आम आदमी पार्टी ने इस जेपीसी का हिस्सा न बनने का फैसला किया है।”

इससे पहले शनिवार को टीएमसी ने भी घोषणा की थी कि वह संविधान 130वाँ संशोधन विधेयक की जांच के लिए गठित जेपीसी में कोई सदस्य नामित नहीं करेगी और इस समिति को फर्जीवाड़ा” करार दिया था। समाजवादी पार्टी भी अपने किसी सदस्य को जेपीसी में नामित करने की संभावना नहीं रखती, पार्टी सूत्रों ने बताया।

शनिवार को प्रकाशित एक ब्लॉगपोस्ट में टीएमसी नेता ओ'ब्रायन ने दावा किया था कि उनकी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने जेपीसी में कोई सदस्य नहीं भेजने का निर्णय लिया है। उनका कहना था कि संसदीय समितियाँ संख्या बल के आधार पर सत्तापक्ष की ओर झुकी रहती हैं।

इस बीच, विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक-2025, संविधान (130वाँ संशोधन) विधेयक-2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक-2025 को 20 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था।

उस दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ, विधेयकों की प्रतियाँ फाड़कर फेंकी गईं और सत्तापक्ष एवं विपक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए, जब गृहमंत्री अमित शाह ने ये बिल पेश किए।

इन विधेयकों में प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर आरोप में लगातार 30 दिन तक गिरफ्तार रहते हैं, तो उन्हें हटाने के लिए एक कानूनी ढांचा उपलब्ध होगा।

दोनों सदनों ने इन विधेयकों को जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। इसे अपनी रिपोर्ट आगामी शीतकालीन सत्र में पेश करनी है, जो नवंबर के तीसरे सप्ताह में बुलाए जाने की संभावना है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।