‘बेटे को नहीं पता था ज़मीन सरकारी है’: अजित पवार बोले – पुणे भूमि सौदा रद्द, राहुल गांधी ने बताया ‘दलितों की ज़मीन की चोरी’

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को अपने बेटे पार्थ पवार से जुड़े विवादित भूमि सौदे पर सफाई देते हुए कहा कि उनके बेटे को यह जानकारी नहीं थी कि जिस ज़मीन की खरीद का सौदा किया गया, वह सरकारी ज़मीन है। उन्होंने बताया कि यह ₹300 करोड़ का सौदा अब रद्द कर दिया गया है, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “दलितों के लिए आरक्षित ज़मीन की चोरी” करार दिया..

‘बेटे को नहीं पता था ज़मीन सरकारी है’: अजित पवार बोले – पुणे भूमि सौदा रद्द, राहुल गांधी ने बताया ‘दलितों की ज़मीन की चोरी’
08-11-2025 - 11:41 AM

पुणे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को अपने बेटे पार्थ पवार से जुड़े विवादित भूमि सौदे पर सफाई देते हुए कहा कि उनके बेटे को यह जानकारी नहीं थी कि जिस ज़मीन की खरीद का सौदा किया गया, वह सरकारी ज़मीन है। उन्होंने बताया कि यह ₹300 करोड़ का सौदा अब रद्द कर दिया गया है, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “दलितों के लिए आरक्षित ज़मीन की चोरीकरार दिया है।

बेटे को जानकारी नहीं थी, जांच से सच सामने आएगा’

अजित पवार ने कहा, “संबंधित ज़मीन सरकारी है जिसे बेचा नहीं जा सकता। पार्थ और उनके पार्टनर दिग्विजय पाटिल को इस बात की जानकारी नहीं थी। अब यह जांच की जा रही है कि रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है। इस मामले की जांच राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खड़गे की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी और एक महीने में रिपोर्ट देगी।”

पवार ने कहा कि पार्थ पवार की कंपनी अमाडिया एंटरप्राइज़ेज़ एलएलपी को ज़मीन स्थानांतरित करने के लिए किसी पर दबाव नहीं डाला गया।
उन्होंने कहा, “एफआईआर में तीन लोगों दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और उप-पंजीयक आर.बी. तारू — के नाम हैं, लेकिन पार्थ का नाम इसलिए नहीं है क्योंकि दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने के लिए वही तीन लोग रजिस्ट्रार कार्यालय गए थे।”

न पैसा दिया, न कब्जा लिया’

अजित पवार ने कहा, “इस सौदे के तहत केवल खरीद का समझौता हुआ था, कोई भुगतान नहीं हुआ था। न पार्थ, न उनकी कंपनी अमाडिया, न मेरे परिवार के किसी सदस्य ने ज़मीन विक्रेता को कोई रकम दी। ज़मीन का कब्जा भी नहीं लिया गया, इसलिए लेनदेन पूरा नहीं हुआ।”

उन्होंने आगे कहा, “पार्थ का कहना है कि सौदा कानून के दायरे में था, लेकिन सार्वजनिक जीवन में किसी तरह के संदेह से भी बचना चाहिए। इसलिए जब आरोप लगे तो उसने सौदा रद्द करने का फैसला किया। बिक्री रद्द करने का दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन कार्यालय में जमा कर दिया गया है।”

40 एकड़ सरकारी ज़मीन पर सौदे का विवाद

यह मामला पुणे के मुंधवा इलाके की 40 एकड़ सरकारी ज़मीन से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹1,800 करोड़ बताई जा रही है। गुरुवार को यह सौदा तब विवादों में आया जब स्पष्ट हुआ कि ज़मीन के हस्तांतरण के लिए ज़रूरी मंजूरियां नहीं ली गई थीं।

पिंपरी चिंचवड़ पुलिस ने इस मामले में एक एफआईआर दर्ज की, जो इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रार के कार्यालय की शिकायत पर हुई। इसमें दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी (जो 272 कथित ‘मालिकों’ का प्रतिनिधित्व कर रही थीं) और उप-पंजीयक आर.बी. तारू के खिलाफ धोखाधड़ी और ग़लत रजिस्ट्रेशन के आरोप हैं।

शुक्रवार को पुणे पुलिस ने एक और एफआईआर दर्ज की, जिसमें दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और निलंबित राजस्व अधिकारी सूर्यकांत येवले को नामजद किया गया।
पुणे कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने बताया, “प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि निलंबित तहसीलदार ने सरकारी ज़मीन के हस्तांतरण की ग़लत अनुमति दी थी।”

राहुल गांधी का हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, मुंधवा की ₹1,800 करोड़ की ज़मीन, जो दलितों के लिए आरक्षित थी, चुराई गई है। ऊपर से इस ज़मीन सौदे पर स्टांप ड्यूटी माफ कर दी गई यानी चोरी भी और टैक्स छूट भी ! यह उसी सरकार की ‘ज़मीन चोरी’ है, जो खुद वोट चोरी’ करके बनी है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, मोदी जी, आपकी चुप्पी बहुत कुछ कहती है, क्या आप इसलिए खामोश हैं क्योंकि आपकी सरकार उन्हीं लुटेरों के सहारे खड़ी है, जो दलितों और वंचितों के अधिकार छीनते हैं?”

क्या थी यह ज़मीन?

राज्य के अधिकारियों के अनुसार, यह भूमि महार वतन’ थी यानी ऐसी ज़मीन जो कभी महार समुदाय (अनुसूचित जाति) के सदस्यों को ग्राम सेवाओं के उत्तराधिकार के रूप में दी गई थी।

अन्ना हज़ारे और विपक्ष की प्रतिक्रिया

भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा, “अगर मंत्रियों के बच्चे गलत काम में शामिल हों, तो ज़िम्मेदारी मंत्री की होती है। असली समस्या मूल्यों की कमी है, यह सब इसलिए होता है क्योंकि पारिवारिक और सामाजिक मूल्य कमजोर पड़ गए हैं।”

शिवसेना (यूबीटी) नेता सुषमा अंधारे ने आरोप लगाया कि राजस्व और पुलिस विभाग पार्थ पवार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जब एक ही दस्तावेज़ (नं. 9018/225) रजिस्ट्रेशन में इस्तेमाल हुआ और जांच रिपोर्ट में पार्थ पवार के हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से दर्ज हैं, तो फिर उन्हें नामजद क्यों नहीं किया गया?”

वहीं, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विपक्ष से कहा कि वह जांच समिति की रिपोर्ट आने तक — यानी एक महीने तक — इंतजार करे।
उन्होंने कहा कि एफआईआर में पार्थ पवार का नाम इसलिए नहीं है क्योंकि वे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर के वक्त उप-पंजीयक कार्यालय में मौजूद नहीं थे।

इस पूरे प्रकरण ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है, जहां अब यह मामला राजनीतिक जवाबदेही, दलित अधिकारों और सत्ता के दुरुपयोग के मुद्दे के रूप में उभर आया है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।