पश्चिम बंगाल चुनाव में डेटा हेरफेर का आरोप, TMC ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल
पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले चरण के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारत निर्वाचन आयोग पर वोटर डेटा में हेरफेर (data manipulation) का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने के आंकड़ों में बड़ा विरोधाभास है, जो संदेह पैदा..
पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले चरण के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारत निर्वाचन आयोग पर वोटर डेटा में हेरफेर (data manipulation) का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने के आंकड़ों में बड़ा विरोधाभास है, जो संदेह पैदा करता है।
वोटर डेटा में गड़बड़ी का आरोप
TMC के अनुसार, पूरे राज्य में करीब 90 लाख (9 मिलियन) नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। लेकिन पहले चरण के मतदान (152 सीटों) के आंकड़ों के मुताबिक केवल 18 लाख (1.8 मिलियन) नाम ही हटाए गए हैं।
पार्टी का सवाल है कि अगर यह सही है, तो दूसरे चरण (142 सीटों) के लिए बाकी 72–78 लाख नाम हटाने का आंकड़ा कैसे संभव है जो तर्कसंगत नहीं लगता।
साकेत गोखले ने उठाए सवाल
TMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आयोग ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि पहले चरण की 152 सीटों पर कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3.6 करोड़ है।
गोखले ने यह भी बताया कि 2021 में इन सीटों पर कुल मतदाता संख्या 3,78,15,288 (लगभग 3.78 करोड़) थी। इसका मतलब है कि संशोधित सूची में केवल 18 लाख नाम ही हटाए गए, जबकि पूरे राज्य में हटाए गए नामों की संख्या 90 लाख बताई जा रही है।
आंकड़ों में विरोधाभास
गोखले के मुताबिक..
- पहले चरण (152 सीटें): हटाए गए नाम ≈ 18 लाख
- कुल हटाए गए नाम (पूरे राज्य): ≈ 90 लाख
- तो दूसरे चरण (142 सीटें) के लिए हटाए गए नाम ≈ 72 लाख होने चाहिए
उन्होंने कहा कि यह गणित मेल नहीं खाता और इससे डेटा में गड़बड़ी की आशंका बढ़ती है।
वोटिंग डेटा छिपाने का आरोप
TMC ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर पहले चरण में पड़े कुल वोटों की संख्या सार्वजनिक नहीं की। पार्टी का दावा है कि यह कदम “अभूतपूर्व मतदान” की कहानी को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
BJP पर भी निशाना
TMC ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के आंकड़ों का इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी के उस प्रचार को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है जिसमें ज्यादा मतदान को सरकार के खिलाफ जनभावना के रूप में पेश किया जाता है।
निष्कर्ष
TMC के आरोपों ने पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान पारदर्शिता और डेटा की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या सफाई देता है और क्या आगे कोई जांच या स्पष्टीकरण सामने आता है।
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