सियासी सवाल...! अजित पवार के साथ आखिर बीजेपी की क्या हुई डील
<p><em><strong>रविवार को महाराष्ट्र की राजनीति में हुए बड़े उलटफेर के बाद राजनीतिक सरगर्मी है। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार को झटका देते हुए उनकी पार्टी के अधिकांश एमएलए को अपने समर्थन में कर लिया और शिंदे सरकार में डिप्टी सीएम की हैसियत से शामिल हो गए। इस मामले में बीजेपी के कुछ उच्च सूत्रों की मानें तो एनसीपी के 43 विधायक, 6 विधान परिषद सदस्य और 3 लोकसभा सांसद उनके साथ जुड़ सकते हैं।</strong></em></p>
महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को हुए बड़े उलटफेर के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज है। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार को झटका देते हुए उनकी पार्टी के अधिकांश एमएलए को अपने समर्थन में कर लिया और शिंदे सरकार में डिप्टी सीएम की हैसियत से शामिल हो गए। इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी से जुड़े शीर्ष सूत्रों की मानें तो एनसीपी के 43 विधायक, 6 विधान परिषद सदस्य और 3 लोकसभा सांसद उनके साथ जुड़ सकते हैं। ऐसे में मंत्रियों की संख्या को लेकर बीजेपी ज्यादा त्याग करने के लिए तैयार है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार की टीम को लेने के लिए हाइकमान से बात हुई थी। राज्य की भलाई को देखते हुए फैसला लेने को कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे कैंप और पवार कैंप के बीच कोई भी मतभेद नहीं है और आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में तीनों पार्टियों को उन्हें एडजस्ट करना है।
अधरझूल में थे अजित पवार
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार और दूसरे नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित थे। सुप्रिया सुले को कार्याध्यक्ष बनाये जाने के बाद बेचैनी बढ़ गयी थी। शरद पवार से अलग हुए नेताओं को सुप्रिया के नेतृत्व पर भरोसा नहीं था। अलग होने के कई और कारण भी थे। बीजेपी सूत्रों के अनुसार एनसीपी के शामिल होने के बाद बीजेपी मंत्री पद की संख्या को लेकर ज्यादा त्याग करेगी। मंत्री पद के इच्छुक लोगों को मना लिया गया है।
सीएम शिंदे की कुर्सी रहेगी
कहा गया कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर कोई संकट नहीं है। वह मुख्यमंत्री बने रहेंगे। अजित पवार को इसके बारे में पहले ही बता दिया गया है। एनसीपी के ज्यादातर नेता 2019 से बीजेपी के साथ जाना चाहते थे। किस मंत्री को क्या जिम्मेदारी दी जानी है इस बारे में विभाग बंटवारे की घोषणा मंगलवार को की जाएगी। कहा गया है कि अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र मंत्रिमंडल का फिर से विस्तार होगा। बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने पूरी जिम्मेदारी महाराष्ट्र बीजेपी नेताओं पर छोड़ दी थी।
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