चालीस में भी चपल सेरेना, उम्र को हराने वाली चैंपियन का संन्यास
25 वर्ष तक टेनिस की दुनिया पर राज करने वाली सेरेना विलियम्स ने टेनिस रैकेट को खूंटी पर टांग दिया। कहने को तो खिलाड़ी संन्यास तब लेते हैं, जब उनकी उम्र बढ़ जाती है या शरीर साथ नहीं देता लेकिन शायद सेरेना विलियम्स के मामले में आप यह नहीं कह पाएंगे। सेरेना जब यूएस ओपन खेलने उतरीं तो शुरुआती दोनों मुकाबले जीते। तीसरे राउंड में उनका सामना अजला टॉमलजानोविच से हुआ तो 3 घंटे से अधिक समय तक वह मैराथन रैकेट घुमाती रहीं। आखिरी जंग में आखिरकार सेरेना 7-5, 6-7 (4), 6-1 से हार गईं, 3 घंटे तक जंग की स्ट्रेंथ बताती है कि यह उम्र बढऩा सिर्फ दिमाग की सोच है।
तभी तो महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने सेरेना की महानता को सलामी भेजते हुए लिखा- उम्र वह नहीं है जो शरीर आपको बताता है बल्कि वह है जो आपका मन शरीर को बताता है। छोटी उम्र में दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं को हल कर सकते हैं, वयस्क (बड़ी उम्र में) कुछ नया और बड़ा कर सकते हैं। खेल समाज को सीमाओं को आगे बढ़ाने और असंभव को हासिल करने के लिए प्रेरित करता है। एक प्रेरक करियर के लिए बधाई सेरेना।
आंकड़ों में देखें तो सेरेना आपको रिकॉर्ड के शिखर पर दिखाई देंगी। टेनिस की दुनिया में उनका कद कहीं से भी स्विट्जरलैंड के महान रोजर फेडरर, सर्बिया के नोवाक जोकोविच और स्पेन के राफेल नडाल से कम नहीं है। ये पुरुष टेनिस के वे त्रिदेव हैं, जो पिछले 3 दशक से राज कर रहे हैं। फेड एक्सप्रेस यानी फेडरर तो 41 की उम्र में भी सरपट दौड़ रही है। टेनिस कोर्ट पर एक-दो वर्ष बाद भी अगर रोजर दिखाई दें तो अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए।
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