चीन का चैन तो ‘इस’ डील ने छीना है...! मोबाइल मार्केट में खत्म हो जाएगा दबदबा
<p><em><strong>भारत ने यूएस के साथ डिफेंस से लेकर चिप टेक्नोलॉजी तक कई डील साइन की हैं। जिससे चीन का सिरदर्द लगातार बढ़ता रहा। लेकिन चीन को असली चिंता में डालने वाला एक समझौता बिना हो-हल्ले के चुपचाप साइन हो गया। इसी ने पड़ोसी की नींद उड़ा दी है।</strong></em></p>
अमेरिका में यूएस प्रेसीडेंट और भारत के पीएम दोस्ती की कसमें खा रहे थे और इधर भारत के पड़ोसी चीन के सीने पर सांप लौट रहे थे। भारत ने यूएस के साथ डिफेंस से लेकर चिप टेक्नोलॉजी तक कई डील साइन की हैं, जिससे चीन का सिरदर्द लगातार बढ़ता रहा। इसी बीच, मोदी ने विपक्ष को भी जवाब दे दिया कि वे चीन को लेकर पूरी तरह से सतर्क हैं और अपनी कार्रवाई लगातार अपने तरीके से कर रहे हैं।
टेलीकाॅम के बदल जाएंगे समीकरण
अमेरिका और भारत के बीच वैसे तो कई डील हुई हैं, लेकिन टेलीकॉम सेक्टर को लेकर दोनों देशों के बीच एक ऐसी डील फाइनल हुई है, जिससे चीन के होश उड़ गए हैं। जिस टेलीकॉम टेक्नोलॉजी पर अमेरिका और भारत के बीच सहमति बनी है, उसमें चीन को ग्लोबल लेवल पर महारथी माना जाता है। अगर अमेरिका भारत की इस मोर्चे पर मदद करता है तो चीन के होश उड़ना लाजमी है।
चीन के दबदबे को करना है धराशायी
यूएस और अमेरिका ने टेलीकॉम सेक्टर में चीन के दबदबे को धराशायी करने का प्लान बनाया है। इस प्लान के तहत दोनों देशों ने मिलकर ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क पर डील की है। इस डील का प्रमुख उद्देश्य मोबाइल नेटवर्क में यूज होने वाले सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को इंटरऑपरेट की फैसिलिटी का देना है। इसमें खास बात ये है कि वेंडर कोई भी हो सकता है। दुनिया की कई कंट्रीज इस पर काम कर रही हैं। इस डील से यूएस और इंडिया जैसे देशों में मल्टी-वेंडर नेक्स्ट जेनरेशन टेलिकॉम सॉल्यूशन डेवलप करने में हेल्प मिल सकती है और दोनों देशों की कंपनियों को इससे फायदा होगा। जिस 4जी, 5जी और 6जी टेक्नोलॉजी में चीन और कुछ यूरोपीय देशों का दबदबा देखने को मिल रहा है, वहां पर भारत की पहुंच भी हो जाएगी और उसे चीन से कंपीट करने में काफी मदद मिलेगी।
चीन की टेलीकॉम कंपनियां हैं नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा
दुनियाभर के देश इस बात को मान चुके हैं कि चीन की टेलीकॉम कंपनियां उनके देश की नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बन सकती है। ऐसे में उन्हें अपने लेवल पर ही चीजों में सुधार लाने की जरुरत है। ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क मॉडल के तहत टेलीकॉम सॉल्यूशन पर भारत और यूएस के बीच आधिकारिक लेवल पर कई मीटिंग्स हो चुकी है। यहां तक की क्वाड में भी इस बारे में सदस्य देशों के बीच खुलकर बातें हुई हैं। ऐसे में चीन की बादशाहत को खत्म करने के लिए कई देशों ने इस पर एक्टिवनेस दिखाई है। अब भारत और अमेरिका भी इस बारे में सिर्फ सोच ही नहीं रहा बल्कि इस पर काम भी शुरू कर रहा है।
किस प्लानिंग पर हो रहा है काम?
कई अमेरिकी कंपनियों जैसे सिस्को ने 4जी और 5जी के अलावा 6जी के डेवलपमेंट के लिए इंडियन कंपनियों के साथ काम करने का मन बना लिया है। जनवरी में भारत और अमेरिका के बीच लॉन्च क्रिटिकल एंड एमर्जिंग टेक्नोलॉजीज की प्रायोरिटी लिस्ट में भी इसे स्पेस मिला है। इसका मकसद एआई, टेलिकॉम, ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क, स्पेस, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स जैसे सेक्टर्स में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत को ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क के तहत कुछ फायदा मिला है। देसी कंपनियों ने एक कंसोर्टियम तैयार किया है। इस ग्रुप ने 4जी और 5जी सॉल्यूशंस को डेवलप करने में अपना अहम योगदान दिया था। इसके अलावा देश में अपना टेलिकॉम स्टैक बनाने का प्रयास हो रहा है, जिससे भारत को हुवावे, जेडटीई, नोकिया और एरिक्सन जैसी कंपनियों का नेक्सेस तोड़ने में मदद मिलेगी।
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