जलवायु परिवर्तन से 100 करोड़ बच्चों पर खतरा..!
मानवाधिकार समूह किड्स राइट्स इंडेक्स ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान के कारण लगभग 100 करोड़ बच्चे अत्यधिक खतरे में हैं। इस मानवाधिकार समूह के अनुसार एक दशक में युवाओं के जीवन स्तर में सुधार नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों द्वारा इकट्टा किए गए आंकड़ों के आधार पर किड्स राइट्स ने यह भी माना है कि दुनिया के एक तिहाई से अधिक बच्चे (लगभग 82 करोड़ बच्चे ) वर्तमान में हीटवेव के संपर्क में थे।
इन देशों को मिली सबसे सर्वश्रेष्ठ व खराब रैंकिंग
दरअसल, किड्स राइट्स इंडेक्स वार्षिक वैश्विक सूचकांक है, यह दुनिया भर के देशों में बाल अधिकारों के सुधारों के पालन को दर्शाता है। बच्चों के अधिकारों की रैंकिंग मेंआइसलैंड, स्वीडन और फिनलैंड को बच्चों के अधिकारों के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। जबकि 185 देशों में से सिएरा लियोन, अफगानिस्तान और चाड को सबसे खराब बताया गया है। वहीं, शीर्ष तीन देशों में से केवल स्वीडन की रैंकिंग बदली है, स्वीडन चौथे स्थान से दूसरे स्थान पर आ गया है।
मार्क डुलार्ट ने रिपोर्ट को लेकर जताई चिंता
किड्स राइट्स के संस्थापक और अध्यक्ष मार्क डुलार्ट ने बच्चों को लेकर जारी की गई इस साल की रिपोर्ट को बच्चों की वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा है कि तेजी से बदलती जलवायु अब उनके भविष्य और उनके मूल अधिकारों के लिए खतरा है।
पानी की कमी भी बड़ा मुद्दा
डच एनजीओ किड्स राइट्स ने कहा कि पानी की कमी ने दुनिया भर में 92 करोड़ बच्चों को प्रभावित किया है, जबकि मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों ने लगभग 60 करोड़ बच्चों को प्रभावित किया है। यानी दुनिया में लगभग हर चार में से एक बच्चा इससे प्रभावित हुआ है।
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