कुरान में लिखी हर बात जरूरी प्रैक्टिस नहीं, हिजाब केस में गाय और बकरीद का जिक्र
हिजाब बैन के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में रोज सुनवाई हो रही है। बुधवार, 21 सितंबर को कर्नाटक सरकार ने दलील दी कि कुरान में जो कुछ भी लिखा है वह धार्मिक तो हो सकता है लेकिन कुरान में लिखा हर शब्द जरूरी प्रैक्टिस नहीं हो सकता है। कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल ने कहा कि तमाम धार्मिक प्रैक्टिस अनुच्छेद-25 में प्रोटेक्टेड नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में हिजाब मामले में 9वें दिन सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल पी. नावाडगी ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने जरूरी प्रैक्टिस की बात कही है। अगर यह मान लिया जाये कि हिजाब का जिक्र कुरान से आया है तो क्या उसे जरूरी प्रैक्टिस मान लिया जाएगा? लेकिन जो भी एक्टिविटी है वह सब जरूरी प्रैक्टिस नहीं हो सकता है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि लेकिन याची का कहना है कि जो भी कुरान में लिखा गया है वह सब ऊपर वाले का शब्द है और वह अनिवार्य है। इस पर कर्नाटक सरकार के वकील ने कहा कि हम कुरान के एक्सपर्ट नहीं हैं लेकिन कुरान का शब्द धार्मिक तो हो सकता है लेकिन हर प्रैक्टिस अनिवार्य प्रैक्टिस नहीं हो सकता है। मुहम्मद हनीफ कुरैशी केस का जिक्र करते हुए सरकार के वकील ने कहा कि बकरीद में गाय काटना भी जरूरी प्रैक्टिस नहीं है।
फ्रांस-तुर्की में महिलाएं हिजाब नहीं पहनती हैं
कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल ने कहा कि बड़ी संख्या में मां और बहनें फ्रांस और तुर्की में हिजाब नहीं पहनती हैं, साथ ही इससे उनके मुस्लिम होने में कोई कमी नहीं हो जाती है। बड़े शहरों में मुस्लिम हिजाब में नहीं दिखती हैं। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने इस दौरान टिप्पणी की कि वह पटना या फिर उत्तर प्रदेश गए थे तो वहां मुस्लिम परिवार से भी मिले थे लेकिन किसी को हिजाब में नहीं देखा था।
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