ईश्वर ना करे ऐसा हो.. किंतु यदि ढह गया टिहरी बांध तो ढह जाएंगे ये शहर भी..!
<p><em>उत्तराखंड को प्रकृति ने भरपूर दिया है लेकिन उसकी इस प्राकृतिक संपदा का दोहन उसके लिए अभिषाप बन रहा है। यहां की जलविद्युत परियोजनाओं को भी प्राकृतिक आपदाओं के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि टनल निर्माण की प्रक्रिया से यहां की जमीन भीतर खोखली होती चली गई और इसके परिणास्वरूप यह जगह-जगह से दरकती जा रही है।</em></p>
ताजा उदाहरण जोशीमठ का हमारे सामने आया है। इन हालात में जलविद्युत परियोजनों के लिए किये जा रहे निर्माण कार्य पर प्रश्न उठ रहे हैं और विश्व के सबसे बड़े बांधों में से एक टिहरी बांध (Tehri dam) पर भी सवाल ख़डे किये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि टिहरी बांध को 24 सौ मेगावॉट बिजली पैदा करने के लिए बनाया गया था.
फिलहाल टिहरी बांघ पर जलविद्युत परियोजना बनने के 17 साल बाद मात्र हजार मेगावॉट ही बिजली उत्पादन हो रहा है। टिहरी बांध को बनाने में जहां टिहरी शहर को जलमग्न होना पड़ा, वहीं 37 गांव पूरी तरह डूब गए। यही नहीं अन्य 88 गांव भी आंशिक रूप प्रभावित हुए हैं। हालात ये हैं कि टिहरी बांध बनने से 40 गांवों में हर समय खतरा मंडराया हुआ है। इन गांवों में अक्सर जमीन दरकने की घटनाएं होती रहतीं हैं। टिहरी बांध में तीन चरणों में काम होना था।
बता दें कि टिहरी बांध के पहले चरण में हजार मेगावॉट का टिहरी बांध निर्माण होना था, जबकि दूसरे चरण में 400 मेगावॉट का कोटेश्वर बांध बनना था और अंत में हजार मेगावॉट की टिहरी पम्प स्टोरेज परियोजना बननी थी। लेकिन, जिस योजना को बनाने में एक पूरी सभ्यता को डूबा दिया गया, वहां अभी भी निर्धारित लक्ष्य के अनुसार बिजली उत्पादन नही हो रहा है। केवल इतना भर ही होता तो काफी था लेकिन अब यह भी माना जाने लगा है कि अगर बड़ी तीव्रता का भूंकप आया तो यह बांध भी टूटने की आशंका है।
ईश्वर ना करे कि ऐसा हो लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा होने पर ऋषिकेश, हरिद्वार ही नहीं बिजनौर, मेरठ और बुलंदशहर तक का क्षेत्र भी पूरी तरह जलमग्न हो सकता है। यदि टिहरी बांध टूटा तो केवल एक घंटे में ही ऋषिकेश और हरिद्वार पूरी तरह पानी में डूब जाएंगे और फिर केवल 12 घंटों में ही बांध का पानी मेरठ तक पहुंच जाएगा। यही नहीं, टिहरी बांध की 42 किलोमीटर लंबी झील को खाली होने में सिर्फ 22 मिनट का समय लगेगा।
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