ये रिपोर्ट है मजाक: दो साल तक आबादी को घर बैठे खिलाने वाला भारत ‘हंगर इंडेक्स’ में 107वें स्थान पर
<p>ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 में भारत को 107वें स्थान पर रखा गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए सरकार का कहना है कि यह भारत की छवि को खराब करने की कोशिश है क्योंकि इंडेक्स में गंभीर खामियां मौजूद हैं। रिपोर्ट जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।</p>
जो देश अपने यहां गरीब आबादी को एक रुपए किलो गेहूं और चावल दे रहा हो, जिसने कोरोना काल में दो साल तक 35 किलो अनाज निशुल्क बांटा हो... और तो और जिसने अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी गेहूं की सप्लाई भेजी हो; वह अपने नागरिकों का पेट तक नहीं भर पा रहा। यह हास्यास्पद तथ्य मिलता है, ग्लोबल हंगर इंडेक्स की ताजा रिपोर्ट में।
केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि वैश्विक भूख सूचकांक 2022 में भारत को 107वें स्थान पर रखना देश की छवि को ‘एक राष्ट्र जो अपनी आबादी की खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है’ के रूप में खराब किए जाने के निरंतर प्रयास का हिस्सा है।
एजेंडा पर आधारित है रिपोर्ट
केंद्र ने कहा कि सूचकांक गंभीर गणना प्रणाली मुद्दों से ग्रस्त है और इसकी गणना त्रुटिपूर्ण है। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जुलाई 2022 में यह मामला खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के समक्ष उठाया गया था कि एफआईईएस (खाद्य असुरक्षा अनुभव पैमाना) सर्वेक्षण मॉड्यूल डेटा के आधार पर इस तरह के अनुमानों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसे सांख्यिकीय निष्कर्ष गुण-दोष पर आधारित नहीं होंगे।
क्या कहती है रिपोर्ट
वैश्विक भूख सूचकांक 2022 में भारत की स्थिति और खराब हुई है तथा वह 121 देशों में 107वें नंबर पर है जबकि बच्चों में ‘चाइल्ड वेस्टिंग रेट’ (ऊंचाई के हिसाब से कम वजन) 19.3 प्रतिशत है जो दुनिया के किसी भी देश से सबसे अधिक है।
बच्चों के आंकड़े पूरी आबादी के कैसे हो गए
केंद्र ने कहा कि सूचकांक की गणना के लिए इस्तेमाल किए गए चार संकेतकों में से तीन बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित हैं और ये पूरी आबादी का प्रस्तुतीकरण नहीं कर सकते। सरकार ने कहा, ‘चैथा और सबसे महत्वपूर्ण संकेतक ‘कुपोषित आबादी का अनुपात’ (पीओयू) का अनुमान 3000 के बहुत छोटे नमूने के आकार पर किए गए एक सर्वेक्षण पर आधारित है।’
What's Your Reaction?