जोशीमठ में भूमि धंसने से दहशत में आमजन घरों को छोड़कर अन्यत्र जाने को मजबूर, सतर्क प्रशासन ने शुरू किये आपदा राहत कार्य, सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर रोक
<p><em>भारत-चीन सीमा से लगे उत्तराखण्ड के चमोली जिले के जोशीमठ नगर में भूमि धंसाव के कारण आमजन दहशत में हैं। बीस हजार की आबादी वाले इस नगर के लोगों के घरों में दरारें देखने को मिल रही हैं। दरारों के कारण स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि जोशी नगर में किसी बड़े अनिष्ट की आशंका के चलते लोगों ने घरों को छोड़ना शुरू कर दिया है।</em></p>
अच्छी बाच यह है कि भूमि-धंसाव की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है। सावधानी बरतते हुए जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल हेलंग बाईपास के निर्माण कार्य, नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के अन्तर्गत निर्माण कार्य के अलावा जोशीमठ नगरपालिका क्षेत्रा के अंन्तर्गत सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है।
इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा जोशीमठ-औली रोपवे का संचालन कार्य भी अग्रिम आदेशों तक रोक दिया है। इसके साथ ही प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को जोशीमठ से स्थानांतरित करने के लिए एनटीपीसी व एचसीसी कंपनियों को एहतियातन अग्रिम रूप से 2-2 हजार प्री-फेब्रिकेटेड भवन तैयार कराने के भी आदेश दिये हैं। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ में हो रहे भूमि धंसाव के सन्दर्भ में आज, शुक्रवार 6 जनवरी को सचिवालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। बैठक में मुख्य सचिव, सचिव आपदा प्रबंधन, सचिव सिंचाई, पुलिस महानिदेशक, आयुक्त गढवाल मण्डल, पुलिस महानिरीक्षक एसडीआरएफ, जिलाधिकारी चमोली सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहने वाले हैं।
उत्तराखण्ड सरकार में लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि इन स्थितियों के संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से चर्चा करके एसडीएम और जिलाधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए कि लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके रहने के पुख्ता इंतजाम किये जाएं। ऐसे मकानों में रहने वालों को पहले चरण में स्थानांतरित किया जाय जिनमें दरारें अधिक हैं, ताकि किसी बड़े खतरे से बचा जा सके।
उल्लेखनीय है कि जोशीमठ में भूमि धंसाव के कारण प्रभावित परिवारों को नगरपालिका, ब्लॉक, बीकेटीसी गेस्ट हाउस, जीआईसी, गुरुद्वारा, इंटर कालेज, आईटीआई तपोवन सहित अन्य सुरक्षित स्थानों रखा गया है। नगर क्षेत्र से 43 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से स्थानंतिरत करने का कार्य किया गया है। इसमें से 38 परिवार को प्रशासन ने स्थानंतरित किया है जबकि पांच परिवार स्वयं सुरक्षित स्थानों पर चले गये हैं।
इस बीच चमोली के जोशीमठ नगर में हो रहे भारी भूस्खलन के विरोध में बुधवार को स्थानीय लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया था। एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना के विरुद्ध लोगों ने जमकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द जोशीमठ में कार्यरत जल विद्युत परियोजना के कार्य को रोकने और जोशीमठ के ट्रीटमेंट के लिए उचित प्रयास करने की मांग की गई।
उधर, संगठन स्तर पर भारतीय जनता पार्टी ने जोशीमठ मे हो रहे भूस्खलन तथा क्षति के आकलन के लिए प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी के नेतृत्व में 14 सदस्यीय समिति का गठन किया है। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद भट्ट के निर्देश पर गठित समिति जल्दी ही स्थलीय भ्रमण कर स्थानीय निवासियों, व्यापारियों तथा जन प्रतिनिधियों से वार्ता कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी।
आपदा राहत और पुलिस बल अलर्ट मोड पर
भूमि धंसाव बढ़ने से खतरे की जद में आए भवनों को चिन्हित किया जा रहा है ताकि जानमाल का कोई नुकसान न हो। राहत शिविरों में बिजली, पानी, भोजन, शौचालय एवं अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं के लिए नोडल अधिकारी नामित करते हुए जिम्मेदारी दी गई है। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना द्वारा स्थिति की लगातार की समीक्षा की जा रही है। अपर जिलाधिकारी डा.अभिषेक त्रिपाठी एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट डा.दीपक सैनी सहित प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है। जोशीमठ भूमि धंसाव के खतरे से निपटने के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस सुरक्षा बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
जोशीमठ पहुंची टेक्निकल टीम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल कमिश्नर सुशील कुमार, आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा, आपदा प्रबंधन के अधिशासी अधिकारी पीयूष रौतेला, एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट रोहितास मिश्रा, भूस्खलन न्यूनीकरण केन्द्र के वैज्ञानिक सांतुन सरकार, आईआईटी रूड़की के प्रोफेसर डा.बीके माहेश्वरी सहित तकनीकी विशेषज्ञों की पूरी टीम जोशीमठ पहुंच गई है। गढ़वाल कमिश्नर एवं आपदा प्रबंधन सचिव ने तहसील जोशीमठ में अधिकारियों की बैठक लेते हुए स्थिति की समीक्षा की। विशेषज्ञों की टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा रहा है।
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