जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने ली मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ, दो वर्षों तक रहेगा उनका कार्यकाल
<p><em><strong>जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार, 9 नवंबर को देश के 50वें मुख्य न्यायधीश के तौर पर शपथ ले ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को शपथ दिलाई। </strong></em></p>
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ आने वाले 2 वर्षों तक इस पद पर आसीन रहेंगे। उनसे पहले यूयू ललित भारत के मुख्य न्यायधीश थे लेकिन 65 वर्ष की आयु पूर्ण करने के कारण वे सेवानिवृत्त हो गये। जस्टिस यूयू ललित का कार्यकाल मात्र 78 दिनों का रहा। वे सबसे कम समय के लिए मुख्य न्यायाधीश रहे। जबकि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के पिता वाईवी चंद्रचूड़, सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रहे थे। वे 22 फरवरी, 1978 से 11 जुलाई, 1985 तक इस पद पर रहे थे। जस्टिस चंद्रचूड़ का कार्यकाल दो सालों तक रहेगा.
परिचय : चीफ जस्टिस ‘धनंजय यशवंत चंद्रचूड़’
डीवाई चंद्रचूड़ का जन्म 11 नवंबर 1959 को हुआ था। उनका पूरा नाम ‘धनंजय यशवंत चंद्रचूड़’ हैं। इनके पिता जस्टिस यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ देश के मुख्य न्यायाधीश थे और इनकी माता प्रभा शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बीए ऑनर्स किया। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी का कोर्स किया। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित InLaks स्कॉलरशिप की मदद से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। हार्वर्ड में, उन्होंने लॉ में मास्टर्स (LLM) और न्यायिक विज्ञान में डॉक्टरेट (SJD) पूरी की। उन्होंने ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल, Yale लॉ स्कूल और University of Witwatersrand, दक्षिण अफ्रीका में लेक्चर्स भी दिए हैं।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अब तक कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए हैं या बेंच के हिस्सा रहे हैं । वे मुख्यतः मैरिटल रेप , सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश, अयोध्या भूमि विवाद,, आईपीसी की धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, आधार योजना की वैधता, सेना और नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने जैसे फैसलों में शामिल रहे हैं।
क्या है पूर्व अनुभव
13 मई 2016 को शीर्ष अदालत में पदोन्नत किया गया था। उन्हें 29 मार्च 2000 को, बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. उन्होंने 31 अक्टूबर 2013 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। चीफ जस्टिस यूयू ललित के रिटायरमेंट के बाद, अब जस्टिस चंद्रचूड़ नवंबर 2022 से भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम करेंगे.
कई बार अपने पिता से अलग नजरिया रखते हैं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
डॉ धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ पहले ऐसे CJI बने हैं, जिनके पिता (न्यायमूर्ति वाई वी चंद्रचूड़) भी देश के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब पिता- पुत्र दोनों ने देश के मुख्य न्यायाधीश के महिमामय पद को सुशोभित किया है। जस्टिस डीवाई चंद्रचू़ड़ भारत के 16वें और सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति वाई वी चंद्रचूड़ के पुत्र हैं लेकिन कानून और न्याय शास्त्र को समझने का उनका अलग नजरिया देखने को मिला है। यही वजह है कि डी वाई चंद्रचूड़ ने रिव्यू के लिए आई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दो बार अपने पिता जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ के फैसलों को ही पलट दिया।
CJI वी वाई चंद्रचूड़ के इन फैसले को बदला
जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने 1976 के ADM जबलपुर केस में पूर्व चीफ जस्टिस और अपने पिता वी वाई चंद्रचूड का फैसला पलट दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अपने फैसले में कहा कि निजता का अधिकार संविधान का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने पूर्व सीजेआई के फैसले को ‘गंभीर रूप से गलत’ बताया जिसे तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस एसए नज़ीर का समर्थन भी मिला था।
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