रूस-यूक्रेन की लड़ाई में भारत की चांदी, इधर से सस्ता खरीदा और उधर बेच डाला महंगा
<p><em><strong>यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद उपजे हालात में भारत की चांदी हो गई है। मौके का फायदा उठाते हुए भारत ने भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदकर रिफाइन करते हुए बड़े मार्जिन के साथ पश्चिमी देशों को ऑयल प्रोडक्ट्स का निर्यात भी किया।</strong></em></p>
यूक्रेन पर हमले के चलते अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए। इससे वे रूस से न तो कच्चा तेल खरीद सकते हैं ना ही गैस। इसका भारत ने जमकर फायदा उठाया और सस्ती दरों पर रूस से कच्चा तेल खरीदकर और उसे रिफाइन करके अमेरिका को बढ़ी हुई कीमतों में बेचा। इससे भारतीय रिफाइनरीज ने जमकर मुनाफा कमाया। सरकार को भी जब लगा कि रिफाइनरीज अच्छा मुनाफा कमा रही है, तो उसने विंडफॉल टैक्स लगाकर खूब राजस्व वसूला।
अमेरिका और कनाडा ने बैन किया हुआ है रूसी तेल
भारत ने इस साल अमेरिका को जमकर वैक्यूम गैसोलीन निर्यात किया है। यह ऑयल प्रोडक्ट्स के लिए भारत का एक असामान्य ट्रेड फ्लो है। पश्चिमी देशों द्वारा रूसी सप्लाई का विकल्प तलाशने के चलते यह हुआ है। यूक्रेन पर हमले के बाद से यूएस और कनाडा ने रूसी तेल आयात को बैन कर दिया है। वहीं, यूरोपियन यूनियन के रूसी क्रूड और ऑयल प्रोडक्ट्स के आयात पर प्रतिबंध क्रमशः 5 दिसंबर और 5 फरवरी को प्रभावी होंगे।
हमने जमकर खरीदा सस्ता रूसी तेल
भारत में रिफाइनरीज ने अप्रैल से अक्टूबर के बीच सस्ते रूसी तेल के आयात को बढ़ाकर 793,000 बैरल प्रति दिन कर दिया है। यह एक साल पहले की समान अवधि के सिर्फ 38,000 बैरल प्रतिदिन से काफी अधिक था। इस खरीद में रिलायंस का हिस्सा करीब 23 फीसदी और नायरा का हिस्सा करीब 3 फीसदी है।
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