अफताब बनाम सुशील शर्मा ! श्रद्धा वॉकर बनाम नैना साहनी ! फ्रिज बनाम तंदूर ! बस.. फिर घुट कर रह गई एक औरत की चीख ..!
<p><em><strong>अपराध वही , तरीका अलग। हां , सजा पाने वाली एक ही थी, एक औरत...एक महबूबा..एक पत्नी..। इस कत्ल में फ्रिज है, उसमे तंदूर था, पार्टनर दोनो में है, इसमें लिव इन पार्टनर है, उसमे लाइफ पार्टनर थी। जी हां ये सब पढ़ कर आपको जरूर 27 साल पहले का तंदूर कांड याद आ गया होगा । </strong></em></p>
वर्ष 1995 में नैना साहनी को उसके पति सुशील शर्मा ने मार डाला। कांग्रेस का युवा नेता और दिल्ली में विधायक सुशील शर्मा को अपनी पत्नी नैना का अपने सहपाठी करीम मतलूब खान से बातचीत करना पसंद नही था। मतलूब और नैना एक-दूसरे को स्कूल के दिनों से जानते थे। घटना के दिन सुशील ने नैना को मतलूब से फोन पर बात करते हुए देख लिया था। वह गुस्से से भर उठा और नैना को गोली मार दी। इसके बाद वह नैना की बॉडी लेकर एक रेस्टोरेंट में गया और वहां के मैनेजर के साथ मिलकर बॉडी ठिकाने लगाने की सोची। बॉडी को राख में तब्दील करने के मकसद से तंदूर में रख दिया गया। 2 जुलाई, 1995 की वह भयानक रात, जब एक रेस्तरां से आग की लपटें निकल रही थीं। इस रेस्तरां में इतनी देर रात खाना नहीं बन रहा था बल्कि एक महिला का शव तंदूर में जल रहा था। नैना साहनी के शव को जलाने के लिए बेरहम पति सुशील ने मैनेजर दोस्त को मक्खन लाने भेजा था, जिससे शव आसानी से जल सके। शव को तंदूर में डालने के लिए पहले उसने चाकू से शव के कई टुकडे किए थे। रेस्तरां से आग की लपटें निकलते देख पास में सब्जी बेचने वाली अनारो चीखने लगी। वह फुटपाथ पर ही सो रही थी। अनारो की चीख सुनकर पास में गश्त कर रहे दिल्ली पुलिस के सिपाही अब्दुल नजीर गुंजू रेस्तरां पहुंचते हैं और सच्चाई सामने आती है।
भारत के इतिहास का यह एक ऐसा केस था जिसने ना केवल राजधानी दिल्ली को बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया था। बाद में पुलिस ने रेस्टोरेंट मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया लेकिन शर्मा भागने में कामयाब रहा। जल्द ही आरोपी तक पुलिस के लंबे हाथ पहुंच गए।
27 साल बाद वही वहशीपन दोबारा सामने आया।
दिल्ली के महरौली में 29 वर्षीय श्रद्धा वाकर की हुई नृशंस हत्या ने सिर्फ राजधानी ही नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अपने जिस प्रेमी आफताब अमीन पूनावाला के साथ श्रद्धा पूरी जिंदगी गुजारने के सपने देख रही थी, उसी आफताब ने उसकी जीवन लीला बेहद क्रूर तरीके से समाप्त कर दी। आशिक से हैवान बने आफताब ने अपने गुनाह को छुपाने के लिए जो किया, वो सुनकर कितने ही मजबूत दिल वाला इंसान हो, उसकी भी आत्मा कांप उठेगी।
आफताब ने श्रद्धा का गला दबाने के बाद उसके शरीर के 35 टुकड़े किए और इन टुकड़ों को रखने के लिए उसने 300 लीटर का बड़ा सा एक फ्रिज खरीदा। हैवानियत की सीमा ये थी कि रोज उसी फ्रिज में से वो खाना ,फल, दूध रखता, और फिर निकालकर खाता था जिसमें उसी लड़की की लाश रखी थी, जिसने उसके साथ जिंदगी बिताने के सपने देखे थे। श्रद्धा ने अफताब के साथ रहने के लिए अपने मां-बाप तक से नाता तोड लिया था। इसके अगले 18 से 20 दिनों तक वो इन टुकड़ों को एक-एक कर दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में फेंकता रहा। हर रात दो बजे वो अपने गुनाह के निशान मिटाने घर से निकलता था।
आफताब ने पूरे जुर्म पर पर्दा डालने और लाश को ठिकाने लगाने की जो तरकीब अपनाई वो किसी हॉरर क्राइम फिल्म या ड्रामा से कम नहीं है। सच्चाई भी यही कि उसने ये सब अमेरिकी क्राइम ड्रामा सीरीज 'डेक्सटर' को देखने के बाद ही किया। यह बात उसने पुलिस के सामने स्वीकार की है।
दो करोड़ लोगों और 90 हज़ार पुलिसवालों के बीच रहकर एक शख्स बेखौफ दिल्ली भर में घूम घूमकर पूरे 18 दिनों तक एक लाश के टुकड़ों को फेंकता रहा और किसी को कुछ पता नहीं चला। क्या आज के दौर में लोग अपने आसपास , पड़ोसियों के प्रति इतने संवेदनहीन हो चुके हैं..? ये दिल्ली शहर की पुलिस और पुलिस के खौफ पर और साथ में इस देश के नागरिकों की संवेदनहीनता पर एक गंभीर प्रश्न है।
What's Your Reaction?