महाराष्ट्र कांग्रेस में हड़कंप : वर्षों पुराने दिग्गज कांग्रेसी नेता बालासाहेब थोराट ने दिया सभी पदों से इस्तीफ़ा
<p>एक तरफ जहां कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भारत भ्रमण कर भारत जोड़ने का दावा करते दिख रहे हैं,वही दूसरी तरफ उनकी खुद की पार्टी के ही नेता एक-एक कर पार्टी से टूटते रहते हैॆ। महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी में तब हड़कंप मच गया जब महाराष्ट्र में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधायक दल के नेता बालासाहेब थोराट ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। आपको बता दें कि बालासाहेब थोराट ने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले के साथ काम करने के साफ इनकार कर दिया था। इसके साथ ही पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले की आलोचना भी जोरों पर है। </p>
बालासाहेब थोराट ने पार्टी हाईकमान को चिट्ठी लिखकर अपनी बात रखी
इस साल 9 राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि महाराष्ट्र कांग्रेस में गुटबाजी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। आपको बता दें कि इस्तीफे से पहले बालासाहेब थोराट ने पार्टी हाईकमान को चिट्ठी लिखकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि उनके लिए नाना पटोले के साथ काम करना मुश्किल है। यही नहीं महाराष्ट्र कांग्रेस में चल रही खींचतान का पता तब चला जब बालासाहेब थोराट के बहनोई और नासिक के एमएलसी रहे सुधीर तांबे ने पार्टी आलाकमान की मंशा के विपरीत चुनाव लड़ने से मना कर दियाऔर अपने बेटे सत्यजीत तांबे को भी निर्दलीय चुनाव लड़वाया।
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महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले को नहीं जानकारी
वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले से जब इस बारे में पुछा गया तो इस विषय में उन्होंने कोई जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि मैंने थोराट को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं।
पुराने दिग्गज हैं थोराट
आपको बता दें कि थोराट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पिछले आठ सालों से लगातार विधायक हैं। वह महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री जैसी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके साथ ही थोराट का परिवार कई पीढ़ियों से कांग्रेसी है। थोराट सहकारी आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं। वे एक दुग्ध सहकारी के संस्थापक और संगमनेर जिला व राज्य सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष हैं। उन्हें संगमनेर तालुका और अकोले तालुका में उनके काम के लिए जाना जाता है। उन्होंने संगमनेर में सहकारी शिक्षण संस्थानों की स्थापना की है। इससे पहले, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में कृषि मंत्री और राजस्व मंत्री और खार भूमि के रूप में कार्य किया है।
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