अरब सागर में बने चक्रवात ने रोकी मानसून की एंट्री...
<p><em><strong>मानसून आम तौर पर 1 जून के आसपास केरल तट से टकराता है। लेकिन साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से अब मानसून के इस साल देरी से पहुंचने की उम्मीद है।</strong></em></p>
देश में मानसून की एंट्री इस बार कुछ देर से होगी। मौसम विभाग ने सोमवार को कहा कि पिछले 24 घंटे में अरब सागर के दक्षिण पूर्व में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन यानी चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके असर की वजह से केरल के तट पर बादल घट गए हैं। ऐसे में मानसून के केरल पहुंचने में इस साल थोड़ी देरी होगी। मई के आखिरी हफ्ते में मौसम विभाग ने मानसून 4 जून तक केरल पहुंचने की संभावना जताई थी।
केरल पर छाए हैं बादल
मौसम विभाग ने कहा कि दक्षिण पूर्व अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना है। बादल छाए हुए हैं। जल्द ही तेज चक्रवाती हवाएं केरल तट की ओर मानसून को आगे बढ़ा सकती हैं। मौसम विभाग ने कहा कि अगले दो-तीन दिनों में स्थितियों में सुधार होने से केरल में मानसून दस्तक दे सकता है।
एक जून के आसपास आता है
मानसून आम तौर पर 1 जून के आसपास केरल तट से टकराता है। 26 मई को मौसम विभाग ने कहा था कि इस साल मानसून 4 जून तक केरल तट पर पहुंच सकता है। लेकिन साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से अब मानसून के इस साल देरी से पहुंचने की उम्मीद है।
पूर्वी भारत के राज्यों में हीट वेव का संकट
उधर, पूर्वी भारत के राज्यों विशेषकर बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में गर्मी का संकट गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में पूर्वी भारत के राज्यों में हीट वेव का संकट और बढ़ने का अंदेशा है।
भारतीय मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक का कहना है कि जब तापमान औसत से 4.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है, तो हीटवेव माना जाता है। अगर तापमान औसत से 6.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो जाता है, तो उसे सीविएर हीटवेव माना जाता है। बिहार में पिछले कुछ दिनों से सीविएर हीटवेव चल रहा है। हमने बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
इस बार सामान्य बारिश का पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने इस साल जून से सितंबर के बीच देश में मानसून की बारिश सामान्य रहने का पूर्वानुमान जताया है। देश के अधिकतर हिस्सों में मानसून सामान्य रहने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत में इस साल मानसून की बारिश औसत से कम रह सकती है।
What's Your Reaction?