बवाल काट रहा है 'फ्रीमियम', नया बिजनेस मॉडल
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अदालतों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों फ्रीबीज छाया हुआ है। लेकिन, चर्चे इन दिनों 'फ्रीमियम' के भी कम नहीं हैं। हाल में जब रतन टाटा ने गुडफेलोज नाम के एक स्टार्टअप में निवेश का ऐलान किया तब भी इसका जिक्र आया। देश में यह पहला स्टार्टअप है जो बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करता है। इसकी लॉन्चिंग पर कहा गया कि यह 'फ्रीमियम' मॉडल पर आधारित होगा।
फ्रीमियम एक तरह का बिजनेस मॉडल है। इसमें सर्विस प्रोवाइडर या ओनर यूजर्स से बेसिक फीचर्स का कोई चार्ज नहीं लेते हैं यानी बुनियादी चीजों को फ्री उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, एडवांस्ड या प्रीमियम सेवाओं और फीचर्स के लिए फीस वसूली जाती है। इस शब्द को गढऩे का श्रेय जैरिड ल्यूकिन को जाता है। फ्रीमियम मॉडल इंटरनेट कंपनियों में काफी लोकप्रिय है। इस मॉडल को अपनाने वाली कंपनियों को पहले निष्ठावान ग्राहक बनाने पड़ते हैं। इसमें ऑनलाइन विज्ञापन, ईमेल और रेफरल नेटवर्क की मदद से प्रीमियम सर्विस के लिए फीस ली जाती है। दूसरे शब्दों के कह सकते हैं कि कुछ सर्विसेज कंपनी फ्री देती है। वहीं, ऐड-ऑन यानी प्रीमियम सर्विस के लिए आपसे पैसे लिए जाते हैं।
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