‘नोटबंदी कैसे लागू की... पूरे कागज दीजिए’ आरबीआई और केंद्र सरकार से बोला सुप्रीम कोर्ट
<p><em><strong>नोटबंदी मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एस. अब्दुल नजीर, बीआर गवई, एएस बोपन्ना, वी रामासुब्रमण्यम और बीवी नागरत्ना की बेंच ने की।</strong></em></p>
देश की सर्वोच्च अदालत ने नोटबंदी लागू करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा छह साल पहले (2016 में) लागू किए गए नोटबंदी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से नोटबंदी लागू करने के संबंधी रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।
बता दें कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एस. अब्दुल नजीर, बीआर गवई, एएस बोपन्ना, वी. रामासुब्रमण्यम और बीवी नागरत्ना की बेंच ने की। पीठ ने पक्षकारों को 10 दिसंबर तक लिखित दलील पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा था कि वह सिर्फ इसलिए हाथ बांधकर नहीं बैठेगी क्योंकि यह एक आर्थिक नीति का फैसला है। कोर्ट ने कहा कि वह इस संबंधी फैसला लेने के तरीकों की जांच कर सकती है।
सीलबंद कवर में पेश हों दस्तावेज
बता दें कि इसी साल 12 अक्टूबर को नोटबंदी को लेकर दायर की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम की दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच सुनवाई के लिए सहमति जताई और अब पीठ ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को नोटबंदी का फैसला लेने से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी से जुड़े सभी रिकॉर्ड सीलबंद कवर में पेश किए जाएं।
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