2008 जयपुर ब्लास्ट केस: विशेष अदालत ने 4 आरोपियों को दोषी ठहराया
साल 2008 के जयपुर सीरियल बम धमाकों के दौरान चांदपोल इलाके के एक मंदिर के पास से एक जिंदा बम मिलने के मामले में, विशेष अदालत ने शुक्रवार को चार आरोपियों को दोषी करार दिया।
जयपुर। साल 2008 के जयपुर सीरियल बम धमाकों के दौरान चांदपोल इलाके के एक मंदिर के पास से एक जिंदा बम मिलने के मामले में, विशेष अदालत ने शुक्रवार को चार आरोपियों को दोषी करार दिया।
विशेष न्यायाधीश रमेश कुमार जोशी ने कहा कि दोषियों की सजा की घोषणा 8 अप्रैल को की जाएगी।
अदालत ने सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आज़मी और शहबाज़ अहमद को भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया है। इन धाराओं के तहत अधिकतम सजा उम्रकैद हो सकती है।
घटना की पृष्ठभूमि: 13 मई 2008 को जयपुर शहर में आठ अलग-अलग जगहों पर सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इसी दौरान चांदपोल बाजार स्थित एक मंदिर के पास एक और बम मिला था, जिसे बाद में निष्क्रिय किया गया था।
ये वही चार आरोपी हैं जिन्हें जयपुर ब्लास्ट के अन्य आठ मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन मार्च 2023 में राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जांच में कई खामियों की ओर इशारा किया था।
सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन अब तक शीर्ष अदालत का फैसला नहीं आया है।
बचाव पक्ष के वकील मिन्हाजुल हक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "इस मामले में अभियोजन पक्ष ने किसी भी गवाह का बयान दर्ज नहीं कराया। इस केस और अन्य आठ बम धमाकों के मामलों के तथ्य समान हैं, जिनमें आरोपी बरी हो चुके हैं। इस मामले में भी अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि मंदिर के सामने बम वाली साइकिल किसने रखी थी। हम इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।"
अभियोजन पक्ष ने अदालत में 112 गवाहों के बयान दर्ज कराए और लगभग 1,200 दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। अब 8 अप्रैल को यह देखा जाएगा कि दोषियों को उम्रकैद या कोई अन्य सजा मिलती है।
यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की जटिलता और आतंकवाद मामलों में जांच की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चर्चा में है।
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