अमेरिका के साथ नयी ट्रेड डील भारत के लिए ‘शुभ संकेत’, निर्यात बढ़ने की उम्मीद: निर्मला सीतारमण
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती के फैसले को भारत के लिए सकारात्मक बताते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यह कदम देश के निर्यात के लिए “शुभ संकेत (गुड ऑग्यूरिंग)” साबित..
नयी दिल्ली। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती के फैसले को भारत के लिए सकारात्मक बताते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यह कदम देश के निर्यात के लिए “शुभ संकेत (गुड ऑग्यूरिंग)” साबित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी और आने वाले समय में निर्यात में तेजी आएगी।
मंगलवार को एक साक्षात्कार में सीतारमण ने कहा, “अब हमारे निर्यात बढ़ेंगे, यही मेरी अपेक्षा है… साथ ही निर्यातक उन नए बाजारों में भी काम जारी रखेंगे, जिन्हें उन्होंने पहले तलाशा था।”
उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ में कटौती निर्यातकों के लिए एक अच्छा संकेत है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है। पिछले साल लगाए गए ऊंचे टैरिफ के कारण भारतीय निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ा था। इससे लैंडेड कॉस्ट बढ़ी, निर्यातकों का मुनाफा घटा और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर हुई। स्टील, एल्युमिनियम, वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद और कुछ कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों को विशेष रूप से नुकसान उठाना पड़ा था, क्योंकि अमेरिकी खरीदारों ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख कर लिया था।
सोमवार को हुए समझौते के तहत अमेरिका ने टैरिफ घटाने पर सहमति जताई, जबकि भारत ने व्यापार बाधाओं को कम करने, रूसी तेल की खरीद रोकने और इसके बजाय अमेरिका तथा संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमति दी है। इस समझौते के लागू होने पर भारत पर अमेरिकी टैरिफ अन्य एशियाई देशों के स्तर, यानी लगभग 15–19 प्रतिशत, के अनुरूप हो जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि हालांकि समझौते का विस्तृत ब्यौरा जल्द सामने आएगा, लेकिन टैरिफ में कटौती अपने आप में निर्यातकों के लिए राहत लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में प्रतिस्पर्धा घटने के बाद जिन नए बाजारों में भारतीय निर्यातकों ने अपनी मौजूदगी बनाई थी, उनके साथ मिलकर अब कुल निर्यात में सुधार देखने को मिलेगा।
एचएसबीसी ग्लोबल इनवेस्टमेंट रिसर्च के अनुसार, पहले लगाए गए दंडात्मक अमेरिकी टैरिफ के कारण सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार अधिशेष औसतन 2.5 अरब डॉलर प्रति माह घट गया था। इसी अवधि में कमजोर निवेश धारणा के चलते जुलाई 2025 से अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा करीब 14 अरब डॉलर की इक्विटी निकासी भी दर्ज की गई।
नया 18 प्रतिशत टैरिफ भारत के प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों जैसे वियतनाम और बांग्लादेश (जहां शुल्क 20 प्रतिशत है) से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की मूल्य प्रतिस्पर्धा फिर मजबूत होगी। इससे परिधान, फुटवियर और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को खास राहत मिलने की उम्मीद है, जो अगस्त में लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
इससे पहले दिन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीतारमण ने इस फैसले को “#MadeInIndia उत्पादों के लिए अच्छी खबर” बताया और कहा कि अब इन पर 18 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा।
ट्रंप द्वारा देर रात सोशल मीडिया के जरिए की गई घोषणा के मुताबिक, यह एक व्यापक समझौते का हिस्सा है, जिसके तहत भारत ने अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की अगले पांच वर्षों में करीब 500 अरब डॉलर की अतिरिक्त खरीद पर भी सहमति जताई है। रूसी तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता के चलते पहले लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी समाप्त हो गए हैं, जिससे भारतीय निर्यात पर प्रभावी टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह गया है।
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