65 नेताओं के खिलाफ मामले वापस लेने के हिमाचल सरकार के फैसले की सुप्रीम कोर्ट करेगा समीक्षा
हिमाचल प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए हाईकोर्ट (HC) के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उसे सांसदों, विधायकों और अन्य नेताओं के खिलाफ दर्ज 65 एफआईआर को पूरी तरह वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया..
नयी दिल्ली। हिमाचल प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए हाईकोर्ट (HC) के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उसे सांसदों, विधायकों और अन्य नेताओं के खिलाफ दर्ज 65 एफआईआर को पूरी तरह वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। इन एफआईआर में गैर-गंभीर अपराधों से जुड़े मामले शामिल हैं।
20 जुलाई 2023 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विभिन्न राजनीतिक दलों के वर्तमान और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ दर्ज 65 एफआईआर में अभियोजन वापस लेने की अनुमति मांगी थी। यह मांग लोक अभियोजकों की सिफारिशों के आधार पर की गई थी।
हाईकोर्ट ने पाया कि 65 में से 5 एफआईआर का पहले ही निपटारा हो चुका है। रिकॉर्ड की जांच के बाद अदालत ने 15 एफआईआर में अभियोजन वापस लेने की अनुमति दी। इसके अलावा, सूची में एक एफआईआर का विवरण दोहराया गया था और चार अन्य मामलों में आरोपियों को बरी या मुक्त किया जा चुका था। इसके बावजूद, हाईकोर्ट के फैसले के एक साल से अधिक समय बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और शेष 39 मामलों में अभियोजन वापस लेने की अनुमति मांगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की।
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने दलील दी कि अभियोजन वापस लेने का निर्णय जनहित में लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह फैसला लोक अभियोजकों और जिला अटॉर्नियों की स्वतंत्र राय के आधार पर, जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) से परामर्श के बाद किया गया।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2021 के अश्विनी कुमार उपाध्याय मामले के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि लोक अभियोजक न्याय के व्यापक हितों को आगे बढ़ाने के लिए अभियोजन वापस ले सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि, “ये सभी मामले और एफआईआर शांतिपूर्ण जन आंदोलनों से जुड़े हैं, जिनमें न तो किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और न ही किसी व्यक्ति को कोई चोट आई।”
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