आतिशबाज़ी और जश्न के बीच दुनिया ने किया 2026 का स्वागत, सबसे पहले इस देश में मना नया साल..

भारत समेत दुनिया भर के देशों में नये साल 2026 का स्वागत भव्य जश्न, काउंटडाउन पार्टियों और समारोहों के साथ किया गया। भारत में राज्य सरकारों ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए, ताकि जश्न शांतिपूर्ण और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हो..

आतिशबाज़ी और जश्न के बीच दुनिया ने किया 2026 का स्वागत, सबसे पहले इस देश में मना नया साल..
01-01-2026 - 10:02 AM
01-01-2026 - 10:15 AM

नयी दिल्ली। भारत समेत दुनिया भर के देशों में नये साल 2026 का स्वागत भव्य जश्न, काउंटडाउन पार्टियों और समारोहों के साथ किया गया। भारत में राज्य सरकारों ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए, ताकि जश्न शांतिपूर्ण और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हो सके।

दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगरों में इंडिया गेट, कनॉट प्लेस और मरीन ड्राइव जैसे प्रमुख स्थलों पर भारी संख्या में लोग नये साल का स्वागत करने उमड़े। हर ओर उत्सव और उल्लास का माहौल देखने को मिला।

देशभर में प्रशासन ने यातायात परामर्श जारी किए, रेस्तरां और होटलों के लिए दिशानिर्देश तय किए और सार्वजनिक स्थानों पर भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए।

दिल्ली में कड़ाके की ठंड के बावजूद कनॉट प्लेस और वसंत विहार में जश्न मनाने वालों की अच्छी-खासी भीड़ देखी गई। परिवारों और दोस्तों के समूह बाजारों और खुले स्थानों में नए साल का इंतज़ार करते नजर आए।

कनॉट प्लेस में पंजाब से आए एक पर्यटक ने कहा, मैं नए साल का जश्न मनाने पंजाब से यहां आया हूं और उम्मीद करता हूं कि यह साल सबके लिए अच्छा रहे।”
वहीं एक अन्य व्यक्ति ने कहा, ठंड तो है, लेकिन दोस्तों के साथ 2026 का स्वागत करके हम बहुत खुश हैं।”

अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में जिन इलाकों में भारी भीड़ की आशंका थी, वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए गए। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी छह सहायक पुलिस आयुक्तों और एक अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी कर रहे थे। अकेले पश्चिमी दिल्ली ज़िले में 1,469 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।

राजस्थान में भी यातायात सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए गए। जगह-जगह चेकपोस्ट लगाए गए, वाहनों की जांच की गई और नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई।

महाराष्ट्र में नए साल के जश्न के मद्देनज़र ढाबों, रेस्तरां, होटलों, ऑर्केस्ट्रा बार और पब को 1 जनवरी की सुबह 5 बजे तक खुले रहने की अनुमति दी गई।

बेंगलुरु में नये साल की पूर्व संध्या पर करीब 20,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। शहर के विभिन्न हिस्सों में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने की संभावना जताई गई थी।

पूर्वी देशों में जहां लोग 2025 को विदा कह रहे थे, वहीं शिमला और मनाली जैसे लोकप्रिय पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी। लोग कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बावजूद पहाड़ों के बीच नए साल का जश्न मनाते नजर आए।

दुनिया के बाकी हिस्सों में 2026 का इंतज़ार जारी रहा, वहीं भारत में घने कोहरे और ठंड के बीच नए साल का स्वागत हुआ। बड़े शहरों की सड़कों पर भारी भीड़ दिखी। मुंबई में मरीन ड्राइव और दिल्ली में कनॉट प्लेस लोगों से खचाखच भरे रहे। यह राजधानी का 2020 के बाद का सबसे ठंडा न्यू ईयर ईव रहा, जहां तापमान गिरकर 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

इस बीच न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, जापान, हांगकांग और चीन में नया साल पहले ही मनाया जा चुका था।

न्यूजीलैंड दुनिया के उन पहले देशों में शामिल रहा, जिसने 2026 में कदम रखा। ऑकलैंड में प्रतिष्ठित स्काई टॉवर के ऊपर भव्य आतिशबाज़ी के साथ नए साल का स्वागत किया गया। आधी रात के जश्न के दौरान 240 मीटर ऊंचे स्काई टॉवर के विभिन्न स्तरों से करीब 3,500 आतिशबाज़ी की गईं। देश की सबसे ऊंची इस इमारत ने एक बार फिर जश्न का केंद्र बिंदु बनाया।

न्यूजीलैंड के मुख्य भूभाग से पूर्व में स्थित चैथम द्वीप समूह देश का वह पहला स्थान रहा, जहां नए साल की शुरुआत हुई।

तस्मान सागर के उस पार ऑस्ट्रेलिया में भी नये साल का आगमन धूमधाम से हुआ। सिडनी, जिसे ‘न्यू ईयर ईव की विश्व राजधानी’ कहा जाता है, में प्रसिद्ध हार्बर पर भव्य आतिशबाज़ी का आयोजन किया गया। इससे पहले बॉन्डी बीच हमले के पीड़ितों की याद में एक मिनट का मौन रखा गया। सिडनी हार्बर ब्रिज को शांति और एकता के प्रतीकों, कबूतर की आकृति तथा “पीस” और “यूनिटी” शब्दों से रोशन किया गया।

जापान में 2026 का स्वागत पारंपरिक नए साल के उत्सव ‘शोगात्सु’ के साथ किया गया। यह पर्व 1 जनवरी से शुरू होकर कई दिनों तक चलता है। परंपरा के अनुसार, नए साल की पूर्व संध्या पर मंदिरों में घंटियां 108 बार बजाई जाती हैं, जो सांसारिक इच्छाओं के त्याग का प्रतीक मानी जाती हैं। घरों की सफाई की जाती है और पाइन, बांस व भूसे से सजावट कर नए आरंभ और सौभाग्य का संदेश दिया जाता है।

दक्षिण कोरिया में साल में दो बार नया साल मनाया जाता है। 1 जनवरी को ‘सिनजॉन्ग’ के रूप में कैलेंडर वर्ष की शुरुआत होती है, जिसे सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा साल के बाद में ‘सियोलल’ यानी चंद्र नववर्ष मनाया जाता है, जिसका सांस्कृतिक महत्व अधिक है।

उत्तर कोरिया भी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी को नया साल मनाता है। हालांकि यहां जश्न अपेक्षाकृत सीमित रहता है लेकिन यह दिन आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है।

दुनिया में सबसे पहले नया साल मनाने वाला देश

प्रशांत महासागर में स्थित किरिबाती देश का किरीतिमाती द्वीप (क्रिसमस आइलैंड) दुनिया का पहला स्थान है, जहां नया साल मनाया जाता है। यह द्वीप UTC+14 समय क्षेत्र में स्थित है।

अन्य देशों में नए साल का समय (भारतीय समयानुसार)

  • रूस (मॉस्को): सुबह 2:30 बजे (1 जनवरी)
  • यूक्रेन: सुबह 3:30 बजे (1 जनवरी)
  • जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली और स्विट्ज़रलैंड: सुबह 4:30 बजे (1 जनवरी)
  • ब्रिटेन, पुर्तगाल और घाना: सुबह 5:30 बजे (1 जनवरी)
  • ब्राज़ील और अर्जेंटीना: सुबह 8:30 बजे (1 जनवरी)
  • अमेरिका (पूर्वी तट): सुबह 10:30 बजे (1 जनवरी)

दुनिया में सबसे अंत में नया साल UTC-12 समय क्षेत्र में स्थित अमेरिकी समोआ तथा बेकर और हॉउलैंड द्वीपों में मनाया जाता है, जहां आधी रात किरिबाती के लगभग एक पूरे दिन बाद आती है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।