ममता बनर्जी ने SIR की कार्यप्रणाली पर फिर उठाए सवाल, चुनाव आयोग को दोबारा लिखा पत्र

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार शाम एक बार फिर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR) की कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण पर गंभीर आपत्तियां..

ममता बनर्जी ने SIR की कार्यप्रणाली पर फिर उठाए सवाल, चुनाव आयोग को दोबारा लिखा पत्र
01-02-2026 - 09:44 AM

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार शाम एक बार फिर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR) की कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया लोगों के लिए भारी परेशानी और पीड़ा का कारण बन रही है।

अपने ताजा पत्र में ममता बनर्जी ने अपने पूर्व के पत्राचार का हवाला देते हुए कहा कि SIR की वजह से आम जनता को “अत्यधिक असुविधा और मानसिक यातना” झेलनी पड़ी है और इस प्रक्रिया के दौरान “करीब 140 लोगों की मौत” हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR को मौजूदा कानून और नियमों का “खुलेआम उल्लंघन” करते हुए लागू किया गया है और इसमें “मानवाधिकारों तथा बुनियादी मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह अनदेखी” की गई है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा, “मैं एक बार फिर आपको पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान अपनाई जा रही उस कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण के संबंध में लिखने को विवश हूं, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों से परे है।”

माइक्रो ऑब्जर्वरों की तैनाती पर आपत्ति

ममता बनर्जी ने कहा कि भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 8,100 माइक्रो ऑब्जर्वरों की तैनाती की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन माइक्रो ऑब्जर्वरों को बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के एकतरफा ढंग से लगाया गया है, जबकि यह प्रक्रिया उनके अनुसार “विशेषज्ञता वाली, संवेदनशील और अर्ध-न्यायिक प्रकृति” की है।

उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान माइक्रो ऑब्जर्वरों की भूमिका, अधिकार और कार्य न तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में परिभाषित हैं और न ही मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 या किसी अन्य वैधानिक प्रावधान में इसकी अनुमति दी गई है।

मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा,
गौरतलब है कि जिन अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस समय SIR की प्रक्रिया चल रही है, वहां चुनाव आयोग ने निर्णय लेने के लिए ERONET पोर्टल के माध्यम से माइक्रो ऑब्जर्वरों की ऐसी कोई तैनाती नहीं की है। यह कदम केवल पश्चिम बंगाल पर चुनिंदा रूप से लागू किया गया है।”

बाहरी अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल

ममता बनर्जी ने त्रिपुरा कैडर के चार IAS अधिकारियों को ऑब्जर्वर बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इनके अलावा केंद्र से पांच और पश्चिम बंगाल से 12 ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कुछ ऑब्जर्वर पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय से ही काम कर रहे हैं और उन्होंने चुनाव आयोग के पोर्टल पर नियंत्रण कर लिया है।

दिल्ली जाकर CEC से मिलने की योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अगले सप्ताह दिल्ली जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगी और इस प्रक्रिया के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं, विसंगतियों और आम लोगों की पीड़ा को उनके सामने रखेंगी।

पहले भी दो बार लिख चुकी हैं पत्र

गौरतलब है कि ममता बनर्जी इससे पहले 3 जनवरी और 10 जनवरी को भी मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिख चुकी हैं।
3
जनवरी के पत्र में उन्होंने चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की थी और चेतावनी दी थी कि इससे “बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किए जाने” का खतरा है, जो भारत की लोकतांत्रिक नींव को “अपूरणीय क्षति” पहुंचा सकता है। उन्होंने इस प्रक्रिया को “अव्यवस्थित, अपर्याप्त तैयारी वाला और तदर्थ” करार देते हुए गंभीर अनियमितताओं, प्रक्रियागत उल्लंघनों और प्रशासनिक चूकों का आरोप लगाया था।

10 जनवरी के पत्र में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि SIR को मतदाता सूचियों में सुधार की बजाय मतदाताओं को बाहर करने की कवायद में बदल दिया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और मनमानी रवैये का भी आरोप लगाया था।

मुख्यमंत्री ने अपने तीन पन्नों के पत्र में लिखा, “सुनवाई की प्रक्रिया अब largely यांत्रिक हो गई है, जो पूरी तरह तकनीकी आंकड़ों पर आधारित है और जिसमें सोच-विचार, संवेदनशीलता और मानवीय स्पर्श का पूरी तरह अभाव है।”
उन्होंने कहा कि यह अभ्यास “न तो सुधार का दिखता है और न ही समावेशन का, बल्कि केवल हटाने और बहिष्कार का प्रतीत होता है।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।