‘कथित पक्षपाती फैसलों’ के आरोप में वकीलों का प्रदर्शन, जज के इस्तीफे की मांग तेज
मद्रास हाईकोर्ट के बाहर सोमवार को वकीलों के एक बड़े जत्थे ने जमकर प्रदर्शन किया और न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ इस्तीफे की मांग की, उन पर ‘जल्दबाज़ी एवं धार्मिक पक्षपात’ वाले निर्णय देने का आरोप लगाया गया। वकीलों का कहना है कि स्वामीनाथन द्वारा तिरुपरंकुंद्रम दीपम मामले में दिए गए आदेशों ने पहाड़ी इलाके में शांति और सामूहिक सद्भाव को भंग कर दिया है..
चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट के बाहर सोमवार को वकीलों के एक बड़े जत्थे ने जमकर प्रदर्शन किया और न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ इस्तीफे की मांग की, उन पर ‘जल्दबाज़ी एवं धार्मिक पक्षपात’ वाले निर्णय देने का आरोप लगाया गया। वकीलों का कहना है कि स्वामीनाथन द्वारा तिरुपरंकुंद्रम दीपम मामले में दिए गए आदेशों ने पहाड़ी इलाके में शांति और सामूहिक सद्भाव को भंग कर दिया है।
वकीलों का आरोप: संवैधानिक शपथ का उल्लंघन
प्रदर्शन में शामिल वरिष्ठ अधिवक्ता सी विजयकुमार ने कहा कि.. “न्यायाधीश ने संवैधानिक शपथ का उल्लंघन किया है। वह संविधान के अंतर्गत धार्मिक या सांप्रदायिक आधार पर पक्षपातपूर्ण आदेश नहीं दे सकते।”
उनके अनुसार, मामले की उचित सुनवाई किए बिना दिए गए आदेश संविधान की बुनियादी न्यायिक प्रक्रिया और धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वामीनाथन ने इससे पहले भी डिवीजन बेंच के निर्देशों की अवहेलना कर अदालत के प्रोटोकॉल और न्यायिक आचरण का उल्लंघन किया है।
मुख्य न्यायाधीश, कॉलेजियम या संसद तक कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि..
- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम तत्काल हस्तक्षेप करें,
- न्यायमूर्ति स्वामीनाथन को किसी अन्य हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जाए।
- यदि यह नहीं हुआ, तो सभी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों को मिलकर संसद में महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
वकीलों का कहना था कि यह कदम न्यायपालिका की स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए जरूरी है।
कई वकील संगठनों ने संयुक्त रूप से बुलाया प्रदर्शन
इस प्रदर्शन को निम्न वकील व सामाजिक संगठन मिलकर आयोजित कर रहे थे..
- ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU)
- लॉयर्स सेंटर फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल कॉज़ेज (LCD&SC)
- पीपल राइट्स प्रोटेक्शन सेंटर (PRPC)
- इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (IAL)
- एडवोकेट्स एसोसिएशन फॉर इक्वैलिटी (AAE)
- डेमोक्रेटिक एडवोकेट्स एसोसिएशन (DAA)
- ऑल इंडिया लॉयर्स’ एसोसिएशन फॉर जस्टिस (AILAJ)
- ऑल इंडिया लॉयर्स काउंसिल (AILC)
- तमिलनाडु मुरपोक्कु वझक्करिंगर्कल पेरावै (TMVP)
प्रदर्शनकारियों ने न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं से निष्पक्ष पुनरावलोकन की अपील की।
प्रभाव और आगे की संभावना
वकीलों का कहना है कि इस तरह के आदेशों से न केवल न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्न उठे हैं बल्कि राज्य में धार्मिक आधार पर सामाजिक और राजनैतिक विभाजन की भी स्थितियाँ बन रही हैं। यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने और व्यापक राजनीतिक व सामाजिक समर्थन जुटाने की चेतावनी दे चुके हैं।
इस मामले में अब देखना होगा कि हाईकोर्ट की ओर से क्या निर्णय आता है — क्या न्यायमूर्ति स्वामीनाथन को हटाया या स्थानांतरित किया जाएगा, या इन वकील संगठनों की मांग को संसद तक ले जाना पड़ेगा।
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