लोकसभा में पारित नहीं हो सका महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, 2/3 बहुमत से चूकी सरकार

केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए लोकसभा संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित करने में विफल रही। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाना और वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून में आवश्यक संशोधन..

लोकसभा में पारित नहीं हो सका महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, 2/3 बहुमत से चूकी सरकार
18-04-2026 - 11:58 AM

नयी दिल्ली। केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए लोकसभा संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित करने में विफल रही। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाना और वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून में आवश्यक संशोधन करना था।

यह विधेयक पारित होने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत, यानी लगभग 360 वोटों की आवश्यकता थी। हालांकि, मतदान के दौरान केवल 298 सांसदों ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया, जिसके चलते विधेयक पारित नहीं हो सका।

संसद टीवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रावधानों के तहत न तो सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत से और न ही उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित हो पाया।

इस विधेयक पर मतदान ध्वनिमत (वॉइस वोट) से नहीं बल्कि मत विभाजन (डिवीजन) के जरिए किया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से यह दर्ज किया जाता है कि कितने सदस्यों ने पक्ष और विपक्ष में मतदान किया।

सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए थे संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026; केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026; और परिसीमन विधेयक। हालांकि शुक्रवार को केवल संविधान संशोधन विधेयक पर ही मतदान हुआ। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार फिलहाल अन्य दो विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।

महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष के विरोध के बाद भाजपा-एनडीए का देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

लोकसभा में महिला आरक्षण को 2029 के आम चुनावों से लागू करने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को विपक्ष के विरोध के चलते गिर गया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी और उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दलों ने विपक्ष के खिलाफ देशभर में व्यापक आंदोलन चलाने की योजना बनाई है।

संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2029 से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के साथ-साथ लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव था। इस तरह के विधेयक को पारित होने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।

तीनों विधेयकों पर चर्चा के बाद हुए मत विभाजन में 298 सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया, जबकि 230 ने इसका विरोध किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि “संविधान (131वां संशोधन) विधेयक सदन में मतदान के दौरान दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया, इसलिए यह पारित नहीं हुआ।”

इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा गुरुवार से शुरू हुई थी, जो संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत का दिन था। विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के बाद 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों में वृद्धि का प्रावधान किया गया था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।