हनुमान जन्मोत्सव जुलूस पर पथराव के बाद नेपाल के बीरगंज में कर्फ्यू लागू
नेपाल के पर्सा ज़िले के बीरगंज नगर पालिका क्षेत्र में शनिवार को हनुमान जयंती के जुलूस के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद कर्फ्यू लागू कर दिया गया।
काठमांडू। नेपाल के पर्सा ज़िले के बीरगंज नगर पालिका क्षेत्र में शनिवार को हनुमान जयंती के जुलूस के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद कर्फ्यू लागू कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, धार्मिक जुलूस पर पत्थरबाजी के कारण समूहों के बीच टकराव हुआ, जिससे कई पुलिसकर्मी और स्थानीय नागरिक घायल हो गए।
जिला प्रशासन कार्यालय ने शनिवार शाम 6:30 बजे से रविवार दोपहर 12 बजे तक बीरगंज नगर के मध्य क्षेत्र में कर्फ्यू लागू करने का आदेश दिया है, जो भारतीय सीमा से सटे रक्सौल के पास स्थित है।
जिला प्रशासन ने एक नोटिस में कहा,"हनुमान जन्मोत्सव समारोह के दौरान तनाव बढ़ने के कारण बीरगंज महानगरपालिका के वार्ड नंबर 14, 15, 16 और 25 में शनिवार शाम 6:30 बजे से रविवार दोपहर 12 बजे तक कर्फ्यू आदेश लागू किया गया है।"
पुलिस ने बताया कि "घंटीघर क्षेत्र से शुरू हुए जुलूस के शहर के अन्य प्रमुख हिस्सों की ओर बढ़ने के दौरान हुए विवाद में कुछ पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग घायल हुए हैं।"
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। तनाव बढ़ने के कारण बीरगंज में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कर्फ्यू आदेश के तहत लोगों की आवाजाही, रैलियों, सभाओं, विरोध-प्रदर्शनों और किसी भी प्रकार के जमावड़े पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नेपाल में हिंसक राजशाही समर्थक प्रदर्शन का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
नेपाल की राजधानी काठमांडू में 28 मार्च को हुए हिंसक राजशाही समर्थक प्रदर्शनों में शामिल मुख्य आरोपी दुर्गा प्रसाई को शुक्रवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन प्रदर्शनों में दो लोगों की मौत हो गई थी।
नेपाल पुलिस के अनुसार, दुर्गा प्रसाई को भारत की सीमा से सटे झापा ज़िले से उनके अंगरक्षक सहित गिरफ्तार किया गया।
28 मार्च को काठमांडू के टिंकुने इलाके में हुए इन प्रदर्शनों में एक फोटो पत्रकार समेत दो लोगों की मौत हो गई थी और 110 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
प्रसाई पर राज्य के विरुद्ध अपराध और संगठित अपराध के तहत आरोप लगाए गए हैं।
काठमांडू जिला अदालत ने नेपाल पुलिस को जांच के लिए उन्हें 12 दिन की हिरासत में रखने की अनुमति दी है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रसाई को असम में स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार किया था और बाद में नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया। उन्हें झापा लाकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
हालांकि नेपाल और भारत के बीच कोई प्रभावी प्रत्यर्पण संधि नहीं होने के कारण असम में उनकी गिरफ्तारी की कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई।
इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी कार्रवाई में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) के महासचिव धवल शमशेर राणा और उपाध्यक्ष रवीन्द्र मिश्रा समेत 60 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था।
नेपाल में RPP समेत कई राजशाही समर्थक समूहों ने हाल ही में देश को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने और राजशाही की बहाली की मांग को लेकर काठमांडू और अन्य क्षेत्रों में प्रदर्शन किए हैं।
RPP ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है।
ज्ञात हो कि नेपाल की संसद ने 2008 में एक घोषणा के माध्यम से 240 साल पुरानी राजशाही को समाप्त कर देश को एक धर्मनिरपेक्ष, संघीय और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था।
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