मैनचेस्टर टेस्ट में ड्रॉ क्यों टीम इंडिया के लिए जीत जैसा है
मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर जब भारत ने चौथे टेस्ट के आखिरी दिन की शुरुआत की, तो तस्वीर साफ थी, मुकाबला बचाना ही लक्ष्य था लेकिन दिन ढलते-ढलते हालात उलट गए। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने खुद 15 ओवर बाकी
नयी दिल्ली। मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर जब भारत ने चौथे टेस्ट के आखिरी दिन की शुरुआत की, तो तस्वीर साफ थी, मुकाबला बचाना ही लक्ष्य था लेकिन दिन ढलते-ढलते हालात उलट गए। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने खुद 15 ओवर बाकी रहते हाथ मिलाने की पेशकश की क्योंकि भारत के बल्लेबाज़ों ने ऐसी जुझारू पारी खेली कि जीत का सपना देख रही इंग्लैंड को ड्रा के लिए कहना पड़ा। यह सिर्फ एक ड्रॉ नहीं था बल्कि यह भारत के लिए नैतिक जीत थी।
0 पर 2 विकेट से 425/4 तक का सफर
दूसरी पारी की शुरुआत में भारत 0 पर 2 विकेट गंवा चुका था और सामने था 311 रन का विशाल घाटा। यहां से मुकाबला निकाल पाना लगभग नामुमकिन लग रहा था। लेकिन कप्तान शुभमन गिल ने मोर्चा संभाला और शानदार शतक (103) जड़कर टीम को पटरी पर लौटाया।
गिल का साथ निभाया अनुभवी केएल राहुल ने, जो 90 रन बनाकर आउट हुए। इन दोनों ने मिलकर 188 रन की साझेदारी की।
राहुल के आउट होने के बाद भी टीम इंडिया नहीं टूटी। रवींद्र जडेजा (101) और वाशिंगटन सुंदर (107)** ने मोर्चा संभाल लिया और 203 रन की अविजित साझेदारी कर मैच पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया।
बेन स्टोक्स का हार मानना और जडेजा-सुंदर की अवहेलना
जब स्टोक्स ने जल्दी मैच समाप्त करने का प्रस्ताव दिया, तो जडेजा और सुंदर ने साफ़ इन्कार कर दिया। उन्होंने न केवल बल्लेबाज़ी जारी रखी बल्कि अपने-अपने शतक पूरे किए, फिर भारत ने 425/4 पर दूसरी पारी घोषित की।
स्टोक्स की हताशा मैदान पर साफ झलकी। उन्होंने जडेजा और सुंदर के साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। उनकी स्लेजिंग और जल्दबाज़ी को भारत ने धैर्य, रणनीति और अनुशासन से जवाब दिया।
5 सेशन, 143 ओवर और एक ऐतिहासिक संघर्ष
भारत ने लगातार पांच सेशन, यानी दो दिनों तक बल्लेबाज़ी की और 143 ओवर खेले — यह किसी भी टीम के लिए आसान नहीं। इसने सिर्फ मैच को ड्रा नहीं कराया, बल्कि इंग्लैंड को मानसिक रूप से भी थका और तोड़ा।
'बेज़बॉल' को जवाब: भारत नहीं झुकता
इंग्लैंड की 'बेज़बॉल' (Bazball) रणनीति का दावा है कि वे कभी ड्रा के लिए नहीं खेलते। लेकिन इस बार इंग्लैंड खुद ड्रा मांग रहा था और भारत ने उन्हें इनकार कर दिया। यह संदेश था कि भारत सिर्फ चुनौती देने नहीं बल्कि वास्तविक मुकाबले के लिए मैदान में है।
रिषभ पंत की बहादुरी और टीम का सामूहिक योगदान
इस ऐतिहासिक लड़ाई में खास बात यह रही कि भारत ने यह सब रिषभ पंत के बिना किया।
पंत ने पहले दिन फ्रैक्चर के बावजूद बल्लेबाज़ी की, और ज़रूरत पड़ने पर फिर से खेलने को तैयार थे। लेकिन गिल, राहुल, जडेजा और सुंदर ने ऐसा प्रदर्शन किया कि पंत की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।
अब ओवल की ओर रुख, सीरीज 2-2 करने की उम्मीद
अब जबकि सीरीज 2-1 पर है और भारत ने चौथा टेस्ट ड्रा कराया, अंतिम टेस्ट ओवल (लंदन) में निर्णायक साबित हो सकता है। भारत वहां जीत हासिल कर सीरीज को 2-2 से बराबर करना चाहेगा।
टिप्पणी
यह सिर्फ एक ड्रा नहीं, मनोबल की जीत थी। भारत ने न केवल मुकाबला बचाया बल्कि इंग्लैंड को मानसिक तौर पर झकझोर दिया। गिल के नेतृत्व, राहुल की स्थिरता, जडेजा-सुंदर की अद्भुत साझेदारी और पंत की निस्वार्थ भावना ने इस मुकाबले को इतिहास में दर्ज करा दिया। अब अगला लक्ष्य है, ओवल में सीरीज बराबर करना और इस टीम इंडिया से कुछ भी मुमकिन है।
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