Parliament Session : पार्टियों के टकराव में धुल गया बजट सत्र...! जनता की गाढ़ी कमाई फूंककर भी महज 5.29 फीसदी हुआ कामकाज
<p><em><strong>13 मार्च से शुरू हुआ संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आखिर तक अखाड़ा बना ही रहा। सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के बीच खास तौर से दो मुद्दों ने ऐसा गतिरोध खड़ा कर दिया कि बजट पर चर्चा वाला महत्वपूर्ण सत्र भी पूरी तरह से इसकी भेंट चढ़ गया।</strong></em></p>
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने के बाद से अखाड़ा ही बना रहा। सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के बीच खास तौर दो मुद्दों ने ऐसा गतिरोध खड़ा कर दिया कि बजट पर चर्चा वाला महत्वपूर्ण सत्र भी पूरी तरह से धुल गया। अंतिम दिन गुरुवार को भी हंगामे के बीच संसद सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद आंकड़े बताते हैं कि लोकसभा 45 घंटे तो राज्यसभा की कार्यवाही मात्र 31 घंटे ही चल सकी।
लोकसभा में सिर्फ 35 फीसदी काम
पिछले कुछ सत्रों से लोकसभा में कामकाज लगभग सौ फीसदी हुआ करता था जो इस बार 35 फीसदी से भी कम पर अटक गया। दरअसल, दूसरे चरण में कामकाज महज 5.29 फीसदी हुआ। संसद का बजट सत्र 31 जनवरी को शुरू हुआ था। पहला चरण 13 फरवरी तक चला, जबकि 13 मार्च से शुरू हुए दूसरे चरण का अंतिम दिन गुरुवार को था। जिस तरह से सत्ता पक्ष और विपक्षी दल अपने-अपने मुद्दे पर अटके थे, उससे संकेत मिल गया था कि यह गतिरोध खत्म नहीं होगा और बजट सत्र का धुलना तय है, हुआ भी यही। हर दिन लोकसभा और राज्यसभा के दृश्य पिछले दिन की पुनरावृत्ति करते दिखाई दिए।
हंगामे सदन की कार्यवाही
कांग्रेस की ओर से मुख्य मुद्दा रहा, अडाणी मामले पर जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की मांग और नारेबाजी। इधर, भाजपा सदस्यों की ओर से राहुल गांधी से विदेश में भारतीय लोकतंत्र की आलोचना के लिए माफी की मांग को तूल दिया गया। दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप, हंगामा-नारेबाजी होती रही और और आखिरकार कार्यवाही स्थगित हो गई।
आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही छह मिनट में स्थगित
सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही लगभग छह मिनट में ही स्थगित कर दी गई। राज्यसभा की कार्यवाही भी इन्हीं मुद्दों पर पहले सुबह कुछ मिनट में स्थगित की गई। फिर दोपहर में दो बजे जब दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति जगदीप धनखड़ की ओर से सदस्यों की जानकारी दी गई कि सदन की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने के मामले में कांग्रेस सांसद रजनी अशोक राव पाटिल की निलंबन अवधि बजट सत्र के बाद तक के लिए बढ़ा दी गई है।
45 घंटे चली लोकसभा की कार्यवाही
इस पर भी टकराव व हंगामा शुरू हो गया, जिसके बाद कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। बजट सत्र का सार यह है कि लोकसभा की कार्यवाही कुल 133.6 घंटे चलना निर्धारित किया गया था, लेकिन हर दिन हंगामा और स्थगन के चलते वह सिर्फ 45 घंटे (34.28 प्रतिशत) ही चल सकी। मतलब कि 88 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए।
राज्यसभा की कार्यवाही 31 घंटे चली
वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही के लिए 130 घंटे निर्धारित थे, लेकिन चली मात्र 31 घंटे (24 प्रतिशत)। उच्च सभा के 99 घंटे पक्ष-विपक्ष का टकराव लील गया। संसद के आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में सिर्फ 4.32 घंटे ही प्रश्न लिए जा सके, जबकि राज्यसभा की स्थिति और खराब रही। वहां सिर्फ 1.85 घंटे ही प्रश्नकाल चल सका।
बजट पर चली 14.45 घंटे चर्चा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि आम बजट पर 14.45 घंटे तक चर्चा चली, जिसमें 145 सदस्यों ने भाग लिया। वहीं, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में 145 सांसदों ने अपने विचार रखे। यह चर्चा 13 घंटे 44 मिनट चली। लोकसभा में कुल आठ प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से छह पारित हो गए।
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